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रैयत नील की खेती से क्यों कतरा रहे थे? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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Question

रैयत नील की खेती से क्यों कतरा रहे थे?

Very Long Answer
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Solution

रैयतों का नील की खेती से कतराने का कारण:

  1. रैयतों को बागान मालिकों द्वारा समझौता करने के लिए बाध्य करना जिससे उन्हें कम ब्याज दरों पर नकद कर्ज मिल जाता था लेकिन उन्हें बागान मालिकों द्वारा कम कीमत पर नील बेचने पर मजबूर किया जाता था जिससे रैयत अपना ऋण नहीं चूका पाते थे और अगली फसल के लिए दोबारा अग्रिम ऋण मिल जाता था और ये चक्र निरंतर चलता था जिससे किसानों की दुर्दशा होने लगी।
  2. बागान मालिक चाहते थे की किसान अपने सबसे उपजाऊ खेतो में ही नील की खेती करें लेकिन नील के साथ एक परेशानी थी की उसकी जड़े बहुत गहरी होती थी और वहां पर नील की खेती के बाद धान की खेती नहीं की जा सकती थी।
  3. सबसे बड़ी समस्या थी की नील की कटाई का वक्त और धान की कटाई का वक्त एक ही होता था जिससे किसानों को नील की कटाई के लिए मजदुर उपलब्ध हो पाते थे।
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यूरोप के लिए फ़सलें
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Chapter 3: ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना - अभ्यास [Page 38]

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NCERT History [Hindi] Class 8
Chapter 3 ग्रामीण क्षेत्र पर शासन चलाना
अभ्यास | Q 6. | Page 38

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रैयत ग्राम - समूह
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किन परिस्थितियों में बंगाल में नील का उत्पादन धराशायी हो गया?


भारत के शुरुआती चाय या कॉफी बाग़ानों का इतिहास देखें। ध्यान दें कि इन बाग़ानों में काम करने वाले मजदूरों और नील के बाग़ानों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन में क्या समानताएँ या फर्क थे।


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