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Question

Very Long Answer
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Solution
पतंगोत्सव मुख्य रूप से मकर संक्रांति (१४ या १५ जनवरी) के दिन मनाया जाता है। इसके अलावा, कुछ स्थानों पर बसंत पंचमी, स्वतंत्रता दिवस (१५ अगस्त), और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव के दौरान भी पतंग उड़ाने की परंपरा है।
- मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिससे दिन बड़े और मौसम सुहावना होने लगता है।
- यह त्यौहार शीत ऋतु के अंत और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है।
- पतंग उड़ाने से लोग खुले आसमान के नीचे रहते हैं और सूर्य की किरणों से विटामिन-डी प्राप्त करते हैं।
- यह त्यौहार परिवार और दोस्तों को एक साथ लाकर मिलकर आनंद मनाने और परंपराओं को जीवंत रखने का अवसर प्रदान करता है।
पतंगों के प्रकार:
- साधारण पतंग → कागज और बांस की तीलियों से बनी पारंपरिक पतंग।
- डेल्टा पतंग → त्रिभुज आकार की पतंग, जो हवा में स्थिर रहती है।
- बॉक्स पतंग → चौकोर या घनाकार पतंग, जो हवा में अधिक ऊँचाई तक उड़ती है।
- रोलर पतंग → पतली छड़ और हल्के कागज़ से बनी पतंग, जिसे मोड़ा जा सकता है।
- फाइटिंग पतंग → धारदार मांझे वाली पतंग, जिसका उपयोग पतंगबाजी प्रतियोगिता में किया जाता है।
पतंगोत्सव के दौरान विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं, जैसे:
- तिल और गुड़ से बने मीठे लड्डू, जो मकर संक्रांति का प्रमुख व्यंजन है।
- तिल और गुड़ से बनी कुरकुरी मिठाई गुड़-तिल की चिक्की।
- कई जगहों पर खिचड़ी और गन्ने का रस पीने की परंपरा होती है।
- गुड़ के साथ बनी मीठी रोटी, जिसे घी के साथ खाया जाता है।
- गुजरात में फाफड़ा-जलेबी बनता है पतंगोत्सव के दौरान विशेष रूप से खाया जाने वाला व्यंजन।
पतंगोत्सव न केवल आनंद और उत्साह का पर्व है, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव भी है। यह त्यौहार लोगों को एक साथ लाने, जीवन में रंग भरने और नई ऊर्जा का संचार करने का काम करता है।
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