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Question
परिणाम लिखिए:
बीमार सेठानी पर धूनी की चुटकी भर राख का -
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Solution
धीरे - धीरे सेठानी की तबियत सुधरने लगी।
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RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित पठित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| 'एक बार एक बहुरूपिये ने साधु का रूप बनाया - सिर पर जटाएँ, नंगे शरीर पर भस्म, माथे पर त्रिपुंड, कमर में लँगोटी। उसके रूप में कहीं कोई कसर नहीं थी और यह संसारत्यागी साधु ही लगता था। उसने नगर से बाहर बड़े-से पेड़ के नीचे अपनी झोंपड़ी तैयार की, बगीचा लगाया और बैठकर तपस्या करने लगा। थीरे-धीरे सारे नगर में यह/समाचार फैलने लगा कि बाहर एक बहुत पहुँचे हुए महात्मा ने आकर डेरा लगाया है। लोग उसके दर्शनों को आने लगे और धीरे-धीरे चारों तरफ साधु का यश फैल गया। सारें दिन उसके यहाँ भीड़ लगी रहती थी। लोग कहते थे कि महात्मा जी के उपदेशों में जादू है और उनके आशीर्वाद से संसार के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं। अपनी इस कीर्ति से साधु को कभी-कभी बड़ा आश्चर्य होता और मन-ही-मन वह अपनी सफलता पर मुसकराया करता। |
उत्तर लिखिए:
(1) बहुरूपिये का साधु रूप ऐसा था: (2)
- माथे पर ______
- सिर पर ______
- नंगे शरीर पर ______
- कमर में ______
(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के विलोमार्थक शब्द गद्यांश में से ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- महल × ______
- असफलता × ______
(ii) निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए: (1)
- डेरा - ______
- लँगोटी - ______
(3) 'हमें अपने व्यवसाय के प्रति ईमानदार होना चाहिए' 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| बहुरूपियों के बारे में हम सब जानते हैं। इन लोगों का पेशा अब समाप्त होता जा रहा है। किसी समय रईसों और अमीरों का मनोरंजन करने वाले बहुरूपिये प्राय: हर नगर में पाए जाते थे। ये कभी धोबी का रूप लेकर आते थे, कभी डाकिए का। हू-बू-हू उसी तरह का व्यवहार करके ये प्राय: लोगों को भ्रम में डाल देते थे। इनकी इसी सफलता से धोखा खा जाने वाला रईस इन्हें इनाम देता था। उसी तरह के बहुरूपिये का एक रूप मैंने राजस्थानी लोककथाओं में सुना था और मुझे वह अभी भी अच्छी तरह याद है। |
(1) एक अथवा दो शब्दों में उत्तर लिखिए:
(क) बहुरूपिये प्राय: यहाँ पाए जाते थे - ______
(ख) बहुरूपिये इनका मनोरंजन करते थे - ______
(ग) बहुरूपिये इनका रूप लेते थे - ______
(घ) ये लोगों को प्राय: भ्रम में डालते थे - ______
(2) (च) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए:
- गरीब
- बुरी
(छ) निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तन करके लिखिए:
- बहुरूपिया
- लोककथाएँ
(3) “व्यक्तित्व विकास में कला का महत्व" अपने विचार लिखिए।
संजाल पूर्ण कीजिए:

परिणाम लिखिए:
बहुरूपिये की वास्तविकता जानने के उपरांत सेठ जी की स्थिति -
निम्नलिखित विधान सही करके लिखिए:
बहुरूपिये हू-बू-हू उसी तरह का व्यवहार करके प्रायः लोगों को भ्रम में नहीं डालते थे।
निम्नलिखित विधान सही करके लिखिए:
एक बार सेठ जी बीमार हो गए।
निम्नलिखित विधान सही करके लिखिए:
सेठानी कभी-कभी आने लगी।
निम्नलिखित विधान सही करके लिखिए:
साधु ने झगड़ा करके सेठ को लौटा दिया।
प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए:

निम्नलिखित वाक्यों को घटनाक्रम के अनुसार लिखिए:
- सेठ जी द्वारा सेठानी को साधु के पास ले जाना।
- बहुरूपिये का साधु का रूप लेना।
- सेठानी का बीमार होना।
- धीरे-धीरे सेठानी की तबियत सुधरना।
‘कला के प्रति ईमानदारी ही सच्चे कलाकार की पहचान है।’ इस सुवचन पर अपने विचार लिखिए।
‘सहयोग से कठिन कार्य की पूर्ति होती है’ विषय पर अपने विचार शब्दांकित कीजिए।
