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प्रकृति उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है? - Hindi Course - A

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Question

प्रकृति उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?

Answer in Brief
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Solution

प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को असीम आत्मीय सुख की अनुभूति होती है। इन सारे दृश्यों में जीवन के सत्य को लेखिका ने अनुभव किया। इस वातावरण में उसको अद्भुत शान्ति प्राप्त हो रही थी। इन अद्भुत व अनूठे नज़ारों ने लेखिका को पल मात्र में ही जीवन की शक्ति का अहसास करा दिया। उसे ऐसा अनुभव होने लगा मानो वह देश और काल की सरहदों से दूर बहती धारा बनकर बह रही हो और उसके अंतरमन की सारी तामसिकताएँ और सारी वासनाएँ इस निर्मल धारा में बह कर नष्ट हो गई हों और वह चीरकाल तक इसी तरह बहते हुए असीम आत्मीय सुख का अनुभव करती रहे।

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साना-साना हाथ जोड़ि...
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Chapter 3: साना-साना हाथ जोड़ि - प्रश्न-अभ्यास [Page 30]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Kritika Part 2 Class 10
Chapter 3 साना-साना हाथ जोड़ि
प्रश्न-अभ्यास | Q 8 | Page 30

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