English

पराधीन सपने हूँ सुख नाहीं। - Hindi [हिंदी]

Advertisements
Advertisements

Question

पराधीन सपने हूँ सुख नाहीं।

Short Answer
Advertisements

Solution

"पराधीन सपने हुँ सुख नाहीं" गोस्वामी तुलसीदास की एक प्रसिद्ध उक्ति है, जिसका अर्थ है कि पराधीन व्यक्ति स्वप्न में भी सुख का अनुभव नहीं कर सकता। पराधीनता, अर्थात् दूसरों के अधीन रहना, मानव जीवन के लिए एक अभिशाप के समान है। ऐसे व्यक्ति की इच्छाएँ, विचार, और कार्य स्वतंत्र नहीं होते, जिससे उसकी आत्मनिर्भरता और सृजन शीलता बाधित होती है। इसलिए, स्वाधीनता का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह आत्मसम्मान, आत्मविश्वास, और सृजनशीलता को प्रोत्साहित करती है। स्वतंत्रता के बिना, न तो व्यक्ति और न ही राष्ट्र का समुचित विकास संभव है।

shaalaa.com
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 13.1: मेरे देश के लाल - अंतःपाठ प्रश्न [Page 24]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Ekatmik [Hindi] Standard 7 Maharashtra State Board
Chapter 13.1 मेरे देश के लाल
अंतःपाठ प्रश्न | Q ७. | Page 24
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×