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Question
पाठ में आए फूलों के नाम, साँपों के नाम छाँटिए और उनके रूप, रंग, विशेषताओं के बारे में लिखिए।
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Solution
- फूलों के नाम इस प्रकार हैं-
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कमल- यह पूजा के काम आता है। इसका बीज, डंठल आदि खाए जाते हैं। इसके पत्ता भोजन परोसने के काम आता है।
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कोइयाँ- यह जल में खिलने वाला पुष्प है। यह कहीं भी जल से भरे गड्ढे में उग जाता है। इसमें से मीठी गंध आती है।
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सिघाड़े का फूल- यह भी जल में उगता है। यह सफेद रंग का होता है। इसके फूल से ही सिघाड़ा नामक फल मिलता है, जिसे खाया जाता है।
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हरसिंगार- यह शरत ऋतु में खिलता है। यह सफेद रंग का होता है तथा इसकी डंडी संतरी रंग की होती है। यह खुशबूदार फूल होता है। यह पूजा के काम आता है। इसे परिजात तथा शेफाली के नामों से जाना जाता है। इसके फूल, पत्ते तथा छाल आयुर्वेद में उपयोगी माने गए हैं।
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कदंब के फूल- यह फूल नींबू के आकार का होता है गोल होता है। यह संतरी रंग का होता है तथा इसमें सफेद रंग की छोटी-छोटी सफेद पंखुड़ियाँ निकली होती है। यह गुच्छे में होता है। इसकी खुशबू बहुत ही अच्छी होती है। यह बहुत उपयोगी फूल है।
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सरसों के फूल- यह पीले रंग के होते हैं। इनसे तैलीय गंध आती है। इसे सरसों के साथ ही पकाया जाता है। इससे सरसों के बीज मिलते हैं।
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भरभंडा- इसे सत्यनाशी कहते हैं। यह बहुत सुंदर होता है। यह पीले रंग का होता है। यह फूल कोमल होता है। बरसात में जब आँखों की बीमारी का प्रकोप फैलता है, तो इस फूल का रस उसे ठीक करने के काम आता है।
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जूही- यह सफेद रंग का खुशबूदार होता है। इसे गजरा बनाने में प्रयोग में लाया जाता है। भगवान को भी इसके फूल चढ़ाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त लेखक ने तोरी, लौकी, भिंडी, भटकटैया, इमली, अमरूद, बैंगन, कोंहड़ा, शरीफ़ा, आम के बौर, कटहल, बेल, अरहर, उड़द, चना, मसूर, मटर के फूल, सेमल के फूलों का भी वर्णन किया है। इनसे हमें फल-सब्ज़ियाँ मिलते हैं।
- साँपों के नाम इस प्रकार हैं-
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डोंड़हा – यह विषहीन साँप हैं। इसे मारा नहीं जाता है। यह वामन जाति का कहलाता है।
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मजगिदवा – यह विषहीन साँप हैं।
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धामिन- यह लंबा होता है। यह भी विषहीन होता है। यदि मुँह से कुछ पकड़कर अपनी पूँछ मारे दे तो वह अंग सड़ जाता है।
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गोंहुअन- इसे फेंटारा नाम से भी जानते हैं। यदि यह किसी को काट ले तो मनुष्य घोड़े की तरह हिनहिनाकर मर सजाता है।
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| शरद में ही हरसिंगार फूलता है। पितर-पक्ख (पितृपक्ष) में मालिन दाई घर के दरवाजे पर हरसिंगार की राशि रख जाती थीं, तो खड़ी बोली हुई। गाँव की बोली में 'कुरइ जात रहीं।' बहुत ढेर सारे फूल मानो इकट्ठे ही अनायास उनसे गिर पड़ते थे। 'कुरइ देना' है तो सकर्मक लेकिन सहजता अकर्मक की है। |
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- ग्रामीण जीवन में प्रकृति के प्रति अलगाव है।
इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए -
- भरभंडा : फूल
- डोंडहा : साँप
- कोइयाँ : जलपुष्प
- धामिन : अनाज
इन युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं -
‘कोई भी तालाब अकेला नहीं है।’ यह कथन दर्शाता है -
कथन (A) - नारी प्रकृति का सजीव रूप है।
कारण (R) - नारी शरीर से उन्हें बिस्कोहर की फसलों, वनस्पतियों की उत्कट गंध आती है।
निम्नलिखित शब्द-युग्मों को सुमेलित कीजिए -
| भाग-1 | भाग-2 | ||
| (1) | भरभंडा | (क) | खेतों में पानी देने के लिए छोटी-छोटी नालियाँ बनाई जाती है |
| (2) | कोइयां | (ख) | एक प्रकार का फल |
| (3) | बरहा | (ग) | कमल का फूल |
| (4) | पुरइ | (घ) | कोका-बेली |
