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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए: आज़ादी का अमृत महोत्सव। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:

आज़ादी का अमृत महोत्सव।

Writing Skills
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Solution

आज़ादी का अमृत महोत्सव

भारतीय स्वतंत्रता का ‘अमृत महोत्सव’ भारत के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और पिछले ७५ वर्षों की उपलब्धियों का एक भव्य उत्सव है। १५ अगस्त १९४७ को भारत को ब्रिटिश गुलामी से आजादी मिली थी। इसी ऐतिहासिक घटना के ७५ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार ने इस महोत्सव का आयोजन किया। इसकी आधिकारिक शुरुआत १२ मार्च २०२१ को साबरमती आश्रम से की गई थी, जो महात्मा गांधी की ऐतिहासिक ‘दांडी यात्रा’ की याद दिलाती है। यह महोत्सव १५ अगस्त २०२३ तक चला, जिसने पूरे देश को राष्ट्रभक्ति के सूत्र में पिरो दिया। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य उन महान क्रांतिकारियों और ‘गुमनाम’ नायकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करना है, जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। इतिहास के पन्नों में कई ऐसे वीर थे जिनका नाम कहीं खो गया था, इस महोत्सव के माध्यम से उन वीरों की गाथाएं जन-जन तक पहुँचाई गईं। इसके पांच प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए गए थे: स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण, ७५ वर्षों के विचार, ७५ वर्षों की उपलब्धियां, ७५ वर्षों के कार्य और ७५ वर्षों के संकल्प। इन स्तंभों के माध्यम से भारत ने अपनी विकास यात्रा का अवलोकन किया और भविष्य की नींव रखी। यह उत्सव केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर एक ‘जन-आंदोलन’ बन गया। ‘हर घर तिरंगा’ जैसी मुहिम ने देश के कोने-कोने में देशभक्ति की एक नई लहर पैदा की। कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर घर पर फहराता तिरंगा भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक बना। इन ७५ वर्षों में भारत ने कृषि, विज्ञान, अंतरिक्ष (इसरो), रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में जो प्रगति की है, उसका प्रदर्शन इस महोत्सव के दौरान गौरव के साथ किया गया। ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प इस महोत्सव की सबसे बड़ी प्रेरणा बनकर उभरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर ‘पंच प्राण’ का मंत्र दिया, जिसमें विकसित भारत का लक्ष्य, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, एकता और नागरिकों के कर्तव्यों पर जोर दिया गया है। यह महोत्सव हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक आजादी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान भी है। निष्कर्षतः, आज़ादी का अमृत महोत्सव हमारे गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य के बीच एक सेतु है। यह हमें आने वाले २५ वर्षों के ‘अमृत काल’ के लिए तैयार करता है। यदि हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें, तो २०४७ तक, जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, हमारा देश निश्चित रूप से एक ‘विकसित राष्ट्र’ और ‘विश्वगुरु’ के रूप में दुनिया का नेतृत्व करेगा।

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