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Question
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए:
‘छोटा मेरा खेत’ कविता में - कवि कागज़ को खेत का ही रूप क्यों मानता है?
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Solution
इस कविता में कवि ने खेती के रूप में कवि-कर्म के हर चरण को बाँधने की कोशिश की है। कवि कागज के एक पन्ने को एक चौकोर खेत मानता है। इस खेत में किसी क्षण आँधी यानी भावनात्मक तूफान के प्रभाव से बीज बोया जाता है। यह बीज रचना, विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है। यह कल्पना के सहारे विकसित होता है और इस प्रक्रिया में स्वयं गल जाता है। इसमें से शब्दों के अंकुर निकलते हैं और अंततः कृति पूर्ण रूप ले लेती है, जो कृषि-कर्म के लिहाज से पुष्पितपल्लवित होने की स्थिति है। साहित्यिक कृति से जो अलौकिक रस-धारा फूटती है, वह क्षण में होने वाली रोपाई का ही परिणाम है। लेकिन यह रस प्रवाह अनंत काल तक चलने वाली कटाई से कम नहीं है। खेत में पैदा होने वाला अन्न कुछ समय के बाद समाप्त हो जाता है, किंतु साहित्य का रस कभी समाप्त नहीं होता।
