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Question
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़कर इसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
| सोहगौड़ा ताम्रपट: यह ताम्रपट सोहगौड़ा (जिला गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) में पाया गया। माना जाता है कि यह ताम्रपट मौर्य कालखंड का होना चाहिए। ताम्रपट पर उकेरे गए लेख ब्राम्ही लिपि में हैं। लेख के प्रारंभ में जो चिह्न हैं; उनमें चबूतरायुक्त पेड़ तथा पर्वत (एक पर दूसरी; इस प्रकार तीन कमानें) ये चिह्न प्राचीन आहत सिक्कों पर भी पाए जाते हैं। चार खंभों पर खड़े दुमंजिला मकानों की भाँति दिखाई देने वाले चिह्न भंडारघरों के निदेशक होंगे; ऐसा अध्ययनकर्तांओं का मत है। इन भंडारघरों के अनाज का उपयोग सावधानीपूर्वक करें; इस प्रकार का आदेश इस लेख में अंकित है। ऐसा माना जाता है कि अकाल सदृश्य स्थिति का निवारण करने के लिए कौन-सी सावधानी बरतनी चाहिए। इस संदर्भ में यह आदेश दिया गया होगा। |
- सोहगौड़ा ताम्रपट किस कालखंड का होना चाहिए? [1]
- सौहगौड़ा ताम्रपट पर उकेरे गए लेख कौन-सी लिपि में हैं? [1]
- सोहगौड़ा ताम्रपट के इतिहास का महत्व लिखिए। [2]
Long Answer
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Solution
- माना जाता है कि सोहगौड़ा ताम्रपट मौर्य कालखंड का होना चाहिए।
- सोहगौड़ा ताम्रपट पर उकेरे गए लेख ब्राह्मी लिपि में हैं।
- सोहगौड़ा ताम्रपट का ऐतिहासिक महत्त्व निम्नलिखित कारणों से है:
- इस ताम्रपट पर अंकित लेख से पता चलता है कि उस समय अकाल जैसी स्थिति से निपटने के लिए अनाज का उपयोग सावधानीपूर्वक करने के आदेश दिए गए थे।
- ताम्रपट पर बने ‘चार खंभों पर खड़े दुमंजिला मकानों’ के चिह्न अनाज के भंडारघरों के बारे में बताते हैं।
- यह ताम्रपट हमें ब्राह्मी लिपि और उस काल के प्रतीकों (जैसे चबूतरायुक्त पेड़ और पर्वत) को समझने में मदद करता है, जो प्राचीन आहत सिक्कों पर भी पाए जाते थे।
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