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Question
निम्नलिखित पदयांश के आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-
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सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज़ संघर्ष ही।। ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे।जो है जहाँ चुपचाप अपने आप से लड़ता रहे। अपने हृदय का सत्य अपने आप हमको खोजना। |
- इस कविता के केंद्रीय भाव हेतु दिए गए कथनों को पढ़कर सबसे सही विकल्प चुनिए-
कथन
(i) प्रतिकूलता के विरुद्ध जूझते हुए बढ़ना ही जीवन की सच्चाई है।
(ii) परिस्थितियों से समझौता करके जोखिमों से बचना ही उचित है।
(iii) लक्ष्य-संधान हेतु मार्ग में भटक जाने का भय त्याग देना चाहिए।
(iv) जीवन में 'अपने छाले, ख़ुद सहलाने' का दर्शन अपनाना चाहिए।
विकल्प
(क) कथन ii सही है।
(ख) कथन i व iii सही हैं।
(ग) कथन i, iii व iv सही हैं।
(घ) कथन i, ii, iii व iv सही हैं। - मरण अर्थात मृत्यु को जीतने का आशय है-
(क) साधुता व साधना से अमरत्व प्राप्त करना।
(ख) योगाध्यास व जिजीविषा से दीर्घायु हो जाना।
(ग) अर्थ, बल व दृढ़ इच्छाशक्ति से जीवन को कष्टमुक्त करना।
(घ) जीवन व जीवन के बाद भी आदर्श रूप में स्मरण किया जाना। - 'आकाश सुख देगा नहीं, धरती पसीजी है कहीं...' का अर्थ है कि-
(क) आकाश और धरती दोनों में संवेदनशीलता नहीं है।
(ख) ईश्वर उदार है, अतः वही सुख देता है, वही पसीजता है।
(ग) जुझारू बनकर स्वयं ही जीवन के दुख दूर किए जा सकते हैं।
(घ) सामूहिक प्रयत्नों से ही संकट की स्थिति से निकला जा सकता है। - अपने आप से लड़ने का अर्थ है-
(क) अपनी अच्छाइयों व बुराइयों से भलीभाँति परिचित होना।
(ख) किसी मुद्दे पर दिल और दिमाग़ का अलग-अलग सोचना।
(ग) अपने किसी ग़लत निर्णय के लिए स्वयं को संतुष्ट कर लेना।
(घ) अपनी दुर्बलताओं की अनदेखी न करके उन्हें दृढ़ता से दूर करना। - युवावस्था हमें सिखाती है कि-
कथन पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए-
कथन
(i) स्वयं को चैतन्य, गतिशील, आत्मआलोचक व आशावादी बनाए रखें।
(ii) सजग रहें; जीवन में कभी कठिन परिस्थितियाँ उत्पन्न ही न होने दें।
(iii) सुख-दुख, उतार-चढ़ाव को भाग्यवादी बनकर स्वीकार करना सीखें।
(iv) प्रतिकूल परिस्थितियों के आगे घुटने न टेकें; बल्कि दो-दो हाथ करें।
विकल्प
(क) कथन i व ii सही हैं।
(ख) कथन i व iv सही हैं।
(ग) कथन ii व iii सही हैं।
(घ) कथन iii व iv सही हैं।
Answer in Brief
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Solution
- कथन i, iii व iv सही हैं।
- जीवन व जीवन के बाद भी आदर्श रूप में स्मरण किया जाना।
- जुझारू बनकर स्वयं ही जीवन के दुख दूर किए जा सकते हैं।
- अपनी दुर्बलताओं की अनदेखी न करके उन्हें दृढ़ता से दूर करना।
- कथन i व iv सही हैं।
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अपठित पद्यांश
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