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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: भारत की भूमि का क्षेत्रफल विश्व की धरती का कुल 2−4% ही है जबकि यहाँ की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या - Hindi [हिंदी]

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Question

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

भारत की भूमि का क्षेत्रफल विश्व की धरती का कुल 2−4% ही है जबकि यहाँ की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का पाँचवाँ भाग है। यहाँ हर वर्ष एक नया आस्ट्रेलिया बन जाता है। अतः यहाँ कृषि के लिए भूमि का अभाव हो गया है। इसके परिणामस्वरूप हजारों वर्षों से हमारी सुख-समृद्धि में योगदान कर रहे अमूल्य जंगलों को काटा जा रहा है। आवास की बढ़ती हुई समस्या के कारण यहाँ हरे-भरे जंगलों के स्थान पर कंकरीट के जंगल बन रहे हैं। इससे हमको दोहरा नुकसान हो रहा है। एक तो खेती के लिए भूमि का अभाव हो रहा है। दूसरा जंगलों के कटने से प्रदूषण सुरसा की तरह मुँह फैला रहा है। हमारी अमूल्य वन संपदा का विनाश, दुर्लभ वनस्पतियों का अभाव, वर्षा पर घातक प्रभाव एवं दुर्लभ जंगली जानवरों के वंश के लोप का भय उत्पन्न हो गया है। जंगलों के कटने से हमारी प्राकृतिक आपदाएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। हस्त शिल्प और कुटीर उद्योगों के चौपट होने के कारण ग्रामवासी आजीविका की खोज में गाँवों को छोड़कर शहरों में बसते जा रहे हैं। इससे शहरों में कुपोषण, अपराध और आवास की विकट समस्याएँ उठ खड़ी हुई हैं। नगरों में भीषण गंदगी और अवैध बस्तियों का निर्माण हो रहा है। प्रदूषण, रोगों में असाधारण वृद्धि, कमरतोड़ महँगाई तथा समुचित चिकित्सा सुविधाओं की कमी ने शहरी जीवन को नारकीय बना दिया है।
  1. कृति पूर्ण कीजिए:                                 [2]
    शहरी जीवन को नारकीय बनाने वाले घटक
    1. .............. 
    2. ..............
    3. ..............
    4. ..............
  2. परिणाम लिखिए:                                 [2]

    हरे-भरे जंगलों के स्थान पर

    कंकरीट के जंगल बनना

    1. ............
    2. ............
  3. ‘पेड़ लगाओ स्वयं को बचाओ’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।                                [2]
Comprehension
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Solution

    1. भीषण गंदगी
    2. अवैध बस्तियों का निर्माण
    3. प्रदूषण
    4. रोगों में असाधारण वृद्धि
  1.  

    हरे-भरे जंगलों के स्थान पर

    कंकरीट के जंगल बनना

    1. कंक्रीट के जंगल बन रहे हैं।
    2. शहरी जीवन नारकीय बन गया है।
  2. पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, वर्षा और छाया देते हैं। पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ता है। इसलिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाकर स्वयं और पृथ्वी को बचाना चाहिए।
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