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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

निम्‍नलिखित पंक्‍तियों से प्राप्त जीवनमूल्‍य लिखिए : आपको महसूस ____________ भीतर दिखो ।

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Question

निम्‍नलिखित पंक्‍तियों से प्राप्त जीवनमूल्‍य लिखिए :

आपको महसूस ______
______ भीतर दिखो ।

Short/Brief Note
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Solution

अपनी रचना 'गजल' के अंतर्गत रचनाकार {माणिक वर्मा} ने इन पंक्तियों में मानवमात्र के प्रति संवेदना की एवं सहृदयता जैसे मानवमूल्यों की बात कही है | वे कहते है कि जिस प्रकार मोमबत्ती का धागा उसके भीतर जलता है उसी प्रकार हमें भी प्रत्येक मनुष्य की अंतर्मन की पीड़ा समझकर उसे दूर करने का यथासंभव प्रयास करना चाहिए | अर्थात हमें पीड़ित के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए |

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गजल
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Chapter 1.08: गजल - स्‍वाध्याय [Page 34]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Lokbharati Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 1.08 गजल
स्‍वाध्याय | Q (४) १. | Page 34

RELATED QUESTIONS

गजल की पंक्‍तियों का तात्‍पर्य :

नींव के अंदर दिखाे - ______


गजल की पंक्‍तियों का तात्‍पर्य :

आईना बनकर दिखो - ______


कृति पूर्ण कीजिए:


जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए :

भीड़


जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए :

जुगनू


जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों, ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए :

तितली


निम्‍नलिखित पंक्‍तियों से प्राप्त जीवनमूल्‍य लिखिए :

कोई ऐसी शक्‍ल ______
______ मुझे अक्‍सर दिखो ।


कृति पूर्ण कीजिए:



प्रस्‍तुत गजल की अपनी पसंदीदा किन्हीं चार पंक्‍तियों का केंद्रीय भाव स्‍पष्‍ट कीजिए।


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आपसे किसने कहा स्‍वर्णिम शिखर बनकर दिखो,
शौक दिखने का है तो फिर नींव के अंदर दिखाे।

चल पड़ी तो गर्द बनकर आसमानों पर लिखो,
और अगर बैठो कहीं ताे मील का पत्‍थर दिखाे।

सिर्फ देखने के लिए दिखना कोई दिखना नहीं,
आदमी हो तुम अगर तो आदमी बनकर दिखाे।

जिंदगी की शक्‍ल जिसमें टूटकर बिखरे नहीं,
पत्‍थरों के शहर में वो आईना बनकर दिखो। 

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए: (2)

‘अ’ ‘आ’
(i) शिखर गर्द
(ii) आसमान जिंदगी
(iii) पत्थर स्वर्णिम
(iv) शक्ल मील
  नींव

(2) उत्तर लिखिए: (2)

(i) मनुष्य को ये बनकर दिखाना है:

  1. ______
  2. ______

(ii) कवि दिखने के लिए कहते हैं:

  1. ______
  2. ______

(3) प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। (2)


पहले शेर में चिराग शब्द एक बार बहुवचन में आया है और दूसरी बार एकवचन में। अर्थ एवं काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से इसका क्या महत्त्व है?


गज़ल के तीसरे शेर को गौर से पढ़े। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है?


आशय स्पष्ट करें:

तेरा निज़ाम है सिल दे जुबान शायर की,
ये एहतियात ज़रूरी है इस बहर के लिए।


दुष्यंत की इस गज़ल का मिजाज बदलाव के पक्ष में है। इस कथन पर विचार करें।


हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है।

दुष्यंत की गज़ल का चौथा शेर पढ़ें और बताएँ कि गालिब के उपर्युक्त शेर से वह किस तरह जुड़ता है?


'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है'  यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है। मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ़ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरा वाक्य को पूरा करें।

यह ऐसे नाते-रिश्तों पर लागू होता है, ______।


'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है' यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है। मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ़ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरा वाक्य को पूरा करें।

यह ऐसे अस्पतालों पर लागू होता है, ______।


'यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है' यह वाक्य मुहावरे की तरह अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थ दे सकता है। मसलन, यह ऐसी अदालतों पर लागू होता है, जहाँ इंसाफ़ नहीं मिल पाता। कुछ ऐसी परिस्थितियों की कल्पना करते हुए निम्नांकित अधूरा वाक्य को पूरा करें।

यह ऐसी पुलिस व्यवस्था पर लागू होता है, ______।


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