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नीचे दी गई पंक्ति का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए- “प्राण प्रणव ओंकार,ध्वनित दिशाएँ उदार,शतमुख-शतरव-मुखरे!”

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Question

नीचे दी गई पंक्ति का अर्थ समझते हुए इनका भाव स्पष्ट कीजिए-

“प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!”

Explain
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Solution

अर्थ: इन पंक्तियों में कवि भारत की आध्यात्मिक गरिमा और उसके विश्वव्यापी प्रभाव का वर्णन करता है। “प्राण प्रणव ओंकार” से अभिप्राय है कि भारत की आत्मा में ‘ॐ’ की पवित्र ध्वनि समाहित है। “ध्वनित दिशाएँ उदार” का तात्पर्य है कि यह दिव्य नाद सभी दिशाओं में गूँजकर अपना प्रभाव फैला रहा है। “शतमुख-शतरव-मुखरे” से आशय है कि असंख्य कंठों और स्वरों के माध्यम से यह पवित्र ध्वनि निरंतर प्रतिध्वनित हो रही है।

भाव: इन पंक्तियों के द्वारा कवि भारत को आध्यात्मिक चेतना, ज्ञान और संस्कृति का महान केंद्र बताता है। भारत की पावन परंपराएँ और आदर्श पूरे विश्व को प्रेरणा प्रदान करते हैं। ‘ॐ’ की दिव्य ध्वनि भारत की आत्मा का प्रतीक है, जो शांति, सद्भाव और सार्वभौमिक एकता का संदेश देती है। इन पंक्तियों में भारत की महान सांस्कृतिक विरासत, उसकी उदारता तथा विश्व-कल्याण की भावना का सुंदर चित्रण किया गया है।

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Chapter 10: भारति, जय, विजयकरे! - अभ्यास [Page 169]

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NCERT Hindi Ganga [English] Class 9
Chapter 10 भारति, जय, विजयकरे!
अभ्यास | Q (ख) | Page 169
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