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Question
मञ्जूषायां प्रदत्तैः अव्ययशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत -
| तु, एव, तदा, किमर्थम्, पुरा, चिरम् |
______ सिन्धुलः नाम राजा आसीत्। सः ______ प्रजाः पर्यपालयत्। वृद्धावस्थायां तस्य एकः पुत्रः अभवत्। ______ सः अचिन्तयत् ______ न स्वपुत्रं भ्रातुः मुञ्जस्य उत्सङ्गे समर्पयामि। सिन्धुलः पुत्रं मुञ्जस्य उत्सङ्गे समर्प्य ______ परलोकम् अगच्छत्। सिन्धुले दिवङ्गते मुञ्जस्य मनसि लोभः समुत्पनः। लोभाविष्टः सः ______ भोजस्य विनाशार्थम् उपायं चिन्तितवान्।
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Solution
पुरा सिन्धुलः नाम राजा आसीत्। सः चिरम् प्रजाः पर्यपालयत्। वृद्धावस्थायां तस्य एकः पुत्रः अभवत्। तदा सः अचिन्तयत् किमर्थम् न स्वपुत्रं भ्रातुः मुञ्जस्य उत्सङ्गे समर्पयामि। सिन्धुलः पुत्रं मुञ्जस्य उत्सङ्गे समर्प्य एव परलोकम् अगच्छत्। सिन्धुले दिवङ्गते मुञ्जस्य मनसि लोभः समुत्पन्नः। लोभाविष्टः सः तु भोजस्य विनाशार्थम् उपायं चिन्तितवान्।
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रेखाङ्कित-पद आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
सिन्धुलस्य भोजः पुत्रः अभवत्।
रेखाङ्कित-पद आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
वत्सराजः भोजं गृहाभ्यन्तरे ररक्ष।
रेखाङ्कित-पद आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
मुञ्जः वह्नौ प्रवेशं निश्चितवान्।
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
भोजः चिरं प्रजाः पालितवान्।
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| आलोक्य |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| अपहाय |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| दत्तम् |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| विचार्य |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| निशम्य |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| विधाय |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| भोक्तव्य |
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
जीव् + शतृ
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
चिन्त् + क्त्वा
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
हन् + तव्यत्
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
आ + नी + तव्यत्
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
आ + कर्ण + ल्यप्
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
नि + क्षिप् + ल्यप्
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
ज्ञा + क्त्वा
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
हन् + क्तवतु
प्रकृति-प्रत्ययं नियुज्य शब्दं लिखत -
आ + दिश् + क्त
उचित अर्थेन सह मेलनं कुरुत -
| (क) | निशीथे | गमिष्यति |
| (ख) | प्रणिपत्य | समुद्रे |
| (ग) | निशम्य | रात्रौ |
| (घ) | पार्श्वे | प्रणम्य |
| (ङ) | विपिने | श्रुत्वा |
| (च) | दशास्यान्तकः | समीपे |
| (छ) | दिवम् | वने |
| (ज) | अधीत्य | रामः |
| (झ) | महोदधौ | स्वर्गम् |
| (ञ) | यास्यति | पठित्वा |
उयाहरणानुसारं लिखत -
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लङ् | प्रथम पुरुष | एकवचन |
| व्यचिन्तयत् |
उदाहरणानुसारं लिखत -
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लङ् | प्रथम पुरुष | एकवचन |
| यास्यति |
उदाहरणानुसारं लिखत -
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लङ् | प्रथम पुरुष | एकवचन |
| मारयिष्यति |
उदाहरणानुसारं लिखत -
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लङ् | प्रथमपुरुष | एकवचन |
| भवति |
उदाहरणानुसारं लिखत -
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लङ् | प्रथम पुरुष | एकवचन |
| असि |
उदाहरणानुसारं लिखत -
| शब्दः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
| यथा- आत्मनः | आत्मन् | पुल्लिङ्गः | षष्ठी | एकवचनम् |
| पुत्राय |
उदाहरणानुसारं लिखत -
| शब्दः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
| यथा- आत्मनः | आत्मन् | पुल्लिङ्गः | षष्ठी | एकवचनम् |
| भूमौ |
उदाहरणानुसारं लिखत -
| शब्दः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
| यथा- आत्मनः | आत्मन् | पुल्लिङ्गः | षष्ठी | एकवचनम् |
| महोदधौ |
रेखाङ्कित-पद आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
सिन्धुलः राज्यं मुञ्जाय॒ अयच्छत्।
