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'महानता लाभलोभ से मुक्ति तथा समर्पण त्याग से हासिल होता है' को केंद्र में रखकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

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Question

'महानता लाभलोभ से मुक्ति तथा समर्पण त्याग से हासिल होता है' को केंद्र में रखकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Long Answer
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Solution

महानता कोई वस्तु नहीं है, जिसे हर मनुष्य द्वारा पाया जा सकता है। यह वह पदवी है, जो विरले किसी व्यक्ति को समाज द्वारा प्राप्त होती है। यह वह सम्मान है, जो व्यक्ति को उसकी उदारता, त्याग तथा समर्पण के कारण प्राप्त होता है। साधारण मनुष्य सारा जीवन लाभ-लोभ के फेर में पड़ा रहता है। उसे अपनी सुख-सुविधाओं की चिंता होती है। वह सारी उम्र उन्हें पाने के लिए प्रयासरत्त रहता है। परन्तु जो मनुष्य इस प्रकार की भावनाओं से मुक्त हो जाता है और परहित के लिए अपना जीवन स्वाहा कर देता है, उसे इस भावना से युक्त माना जाता है। यह भाव मनुष्य को अपने लिए नहीं दूसरे के लिए करने के प्रेरित करता है। ऐसा व्यक्ति भगवान के समक्ष आ बैठता है।

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तुलसीदास
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Chapter 1.07: तुलसीदास - भरत-राम का प्रेम, पद - योग्यता विस्तार [Page 38]

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NCERT Hindi Antara Bhag 2 Class 12
Chapter 1.07 तुलसीदास - भरत-राम का प्रेम, पद
योग्यता विस्तार | Q 1. | Page 38
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