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Question
माँग के अनुसार अर्थव्यवस्था (ऑन डिमांड इकॉनॉमी):
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माँग के अनुसार अर्थव्यवस्था अर्थात् डिजिटल मार्केट और तकनीकी कंपनियों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं का तत्काल वितरण करके ग्राहकों की माँग उनकी इच्छा के अनुसार पूरा करने के लिए तैयार की गई आर्थिक क्रिया है। माँग के अनुसार अर्थव्यवस्था को कभी-कभी ‘एक्सेस इकोनॉमी’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ की कंपनियाँ बाज़ार में रहने वाले उनकी श्रृंखला दुकानों, एवं थोक तथा छोटे - बड़े व्यापारी, ग्राहकों के लिए उनकी सुविधा के अनुसार वस्तु और सेवा पूर्ति के मार्ग निर्माण करते हैं। ग्राहकों की सुविधा के अनुसार और इन वस्तुओं और सेवाओं का अच्छी तरह से अनुभव मिलना चाहिए इसलिए सुविधाएँ, गति और सादगी जैसी विशेषताओं को यह कंपनियाँ प्राथमिकता देती हैं। वैसे ही ग्राहकों की माँग के अनुसार और रूचि/अरूचि के अनुसार यह कंपनियाँ वस्तुओं और सेवाओं की पूर्ति करती हैं। वह वस्तुएँ वापिस लेना और वस्तुएँ और सेवाएँ जल्द से जल्द उपलब्ध कर देना ऐसी विभिन्न सुविधाओं के कार्य करते हैं। इसलिए आज माँग के अनुसार अर्थव्यवस्था अतुलनीय गति से बढ़ रही है। आजकल बहुत सी लोकप्रिय वस्तुओं एवं सेवाओं का नियमित रूप से असंख्य ग्राहकों द्वारा उपयोग माँग पर आधारित अर्थव्यवस्था के उदाहरण हैं। राईड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म उबेर एवं ओला, किराना वितरण सेवा जैसे- बिग-बास्केट, डंजों एवं रिलायंस जिओ मार्ट माँग पर आधारित अर्थव्यवस्था सेवाओं के कुछ उदाहरण हैं। |
प्रश्न:
- माँग के अनुसार अर्थव्यवस्था को क्या कहते हैं? (१)
- माँग के अनुसार अर्थव्यवस्था के कोई दो उदाहरण लिखिए। (१)
- उपर्युक्त परिच्छेद के लिए, स्वमत (आपके विचार) लिखिए। (२)
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Solution
- ऑन-डिमांड इकोनॉमी (मांग-आधारित अर्थव्यवस्था) को कभी-कभी एक्सेस इकोनॉमी (पहुंच-आधारित अर्थव्यवस्था) के रूप में भी जाना जाता है।
- ऑन-डिमांड इकोनॉमी पर आधारित दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- उबर
- रिलायंस जियो मार्केट
- चूंकि ऑन-डिमांड इकोनॉमी वस्तुओं और सेवाओं को आसानी से सुलभ (सुलभ) बनाती है, इसलिए थोक विक्रेता (wholesalers), खुदरा विक्रेता (retailers) और उपभोक्ता इन दिनों इसका व्यापक रूप से उपयोग कर रहे हैं। भारत में इसका विस्तार ऐसी गति से हो रहा है जो पहले कभी नहीं देखी गई।
