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Question
माध्यमभाषया ससन्दर्भं स्पष्टीकुरुत।
येनाहं स्यां बहुव्रीहि:।
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Solution 1
English:
The expression “येनाहं स्यां बहुव्रीहिः” (“By which I may become a Bahuvrihi”) is a clever and witty play on Sanskrit grammatical terms used in literary contexts. In Sanskrit grammar (Vyakarana), a Bahuvrihi compound is a possessive compound where the constituent words together denote a separate, external entity (e.g., bahur vrihir yasya sah – “one who has much rice,” meaning a rich man). Metaphorically and humorously, the speaker uses this grammatical metaphor to pray or express a wish to become significant, prosperous, or possessive of great qualities, elevating the mundane state of being an ordinary word (padartha) to one of supreme importance.
Solution 2
हिंदी:
“येनाहं स्यां बहुव्रीहिः” (“जिससे मैं बहुव्रीहि समास बन जाऊँ”) यह संस्कृत व्याकरण के पारिभाषिक शब्दों पर आधारित एक अत्यंत चतुर और हास्यपूर्ण साहित्यिक प्रयोग है। संस्कृत व्याकरण में ‘बहुव्रीहि’ वह समास होता है जिसमें पद के दोनों अवयव मिलकर किसी अन्य (तीसरे) अर्थ की प्रधानता को दर्शाते हैं (जैसे—बहु व्रीहिः यस्य सः)। यहाँ कवि या वक्ता व्याकरण के इस नियम का मज़ाकिया और प्रतीकात्मक ढंग से प्रयोग करते हुए यह कामना करता है कि वह साधारण स्थिति से उठकर किसी विशिष्ट, समृद्ध या महत्वपूर्ण अर्थ वाला (अर्थात बहुव्रीहि के समान प्रधान) बन जाए।
Solution 3
मराठी:
“येनाहं स्यां बहुव्रीहिः” (“ज्यामुळे मी बहुव्रीहि समास व्हावा”) हे संस्कृत व्याकरणातील तांत्रिक संज्ञेवर आधारलेले एक मार्मिक आणि विनोदी साहित्यिक विधान आहे. संस्कृत व्याकरणानुसार ‘बहुव्रीहि’ समासात दोन्ही पदे मुख्य नसून इतर पदाचा (तिसऱ्याच अर्थाचा) बोध होतो आणि तो शब्द विशेषण म्हणून मुख्य ठरतो (उदा. बहु व्रीहिः यस्य सः). येथे कवी किंवा वक्ता व्याकरणिक संकल्पनेचा खुबीने वापर करून साध्या स्थितीतून उठून अत्यंत महत्त्वाचा, संपन्न किंवा वैशिष्ट्यपूर्ण बनण्याची आपली इच्छा मजेशीर रीतीने व्यक्त करतो.
