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Question
माध्यमभाषया ससन्दर्भ स्पष्टीकुरुत।
तिष्ठत्यपास्य श्रममिष्टकायामनादिकालादिह पाण्डुरङ्ग:।
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Solution 1
English:
This verse describes the eternal presence of Lord Panduranga (Vitthala) at Pandharpur. Standing patiently on a brick (ishtika) for time immemorial, the Lord has set aside all fatigue to watch over, protect, and bless His devotees who come seeking refuge and divine grace.
Solution 2
हिंदी:
इस श्लोक में भगवान पांडुरंग (विट्ठल) के पंढरपुर में शाश्वत निवास का वर्णन किया गया है। अनादि काल से ईंट पर कमर पर हाथ रखकर खड़े भगवान पांडुरंग अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने और उन्हें दर्शन देने के लिए समस्त थकान को त्यागकर यहाँ सदा के लिए विराजमान हैं।
Solution 3
मराठी:
या श्लोकात पंढरपुरात अनादि काळापासून विटेवर उभे असलेल्या श्री पांडुरंगाच्या (विठ्ठलाच्या) नित्य स्वरूपाचे वर्णन केले आहे. भक्तांच्या उद्धारासाठी आणि त्यांच्यावरील कृपावर्षाव करण्यासाठी पांडुरंग सर्व श्रम बाजूला सारून विटेवर अचल व प्रसन्न मुद्रेने उभा आहे.
