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कविता (चिंता) की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में, भोले थे, हॉंतिरते केवल सब विलासिता के नद में। वे सब डूबे, डूबा उनका - Hindi [हिंदी]

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Question

कविता (चिंता) की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।

प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में,
भोले थे, हॉं तिरते केवल सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे, डूबा उनका विभव, बन गया पारावर
उमड़ रहा था देव सुखों पर दुख जलधि का नाद अपार’’

Short/Brief Note
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Solution

कवि प्रसाद के अनुसार प्रकृति तो अजेय रही है | देवता गण जो नशे में चूर थे, उन्हींको पराजय झेलनी पड़ी है | प्रलय के पूर्व देवता गण भोले बने हुए थे, तथा सुख और विलासिता की नदी में अवगाहन करते थे | विलासिता पूर्ण जीवन जीने वाले लोग तथा विलासी उपकरण सभी प्रलय के जल में डूब गए | देवताओं के सुखी जीवन पर दुख का सागर उमड़ पड़ा था |

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चिंता
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Chapter 2.09: चिंता - स्‍वाध्याय [Page 102]

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Balbharati Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 2.09 चिंता
स्‍वाध्याय | Q (६) | Page 102
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