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Question
कुटज के बारे में उसकी विशेषताओं को बताने वाले दस वाक्य पाठ से छाँटिए और उनकी मानवीय संदर्भ में विवेचना कीजिए।
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Solution
- शिवालिक की सूखी और नीरस पहाड़ियों पर मुस्कुराते हुए ये वृक्ष द्वंद्व से परे, पूर्णतः निश्चिंत प्रतीत होते हैं।
- इनमें एक अनोखी-सी अदा है, जो इन्हें मुस्कुराते हुए सा प्रतीत कराती है।
- हे उजाड़ के साथी, मैं तुम्हें भली-भाँति पहचानता हूँ।
- धन्य हो कुटज, तुम वास्तव में ‘गाढ़े के साथी’ हो।
- फूल तो गमलों में भी मिल जाते हैं, पर कुटज तो जंगल का घुमक्कड़ है।
- कुटज अपने मन को नियंत्रित करता है, वह मन के नियंत्रण में नहीं रहता।
- क्या कुटज केवल जी रहा है?
- कुटज इन सभी दिखावटी आडंबरों से मुक्त है।
- मेरे सामने खड़ा यह कुटज का लहराता पौधा नाम और रूप दोनों में अपनी अपराजेय जीवन-शक्ति की घोषणा कर रहा है।
- यह कुटज ही है, मनोहर पुष्प-गुच्छों से सजा, उल्लास से भरपूर, सुंदर मुस्कान वाला कुटज।
मानवीय संदर्भ में विवेचना – लेखक ने छोटे-से कुटज पौधे की विशेषताओं का मानवीय संदर्भ में विश्लेषण किया है। कुटज हर अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थिति में मुस्कराता रहता है, स्वयं भी आनंदित रहता है और दूसरों को भी आनंद प्रदान करता है। वह साहसपूर्वक कठिन परिस्थितियों का सामना करता है। कुटज जीवन को बोझ मानकर नहीं जीता, बल्कि अपने पुरुषार्थ से प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना लेता है।
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लेखक ने ‘कुटज’ को ही क्यों चुना? उसको अपनी रचना के लिए जंगल में पेड़-पौधे तथा फूलों-वनस्पतियों की कोई कमी नहीं थी।
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