Advertisements
Advertisements
Question
कुछ लोग ऐसा सोचते हैं - "शहरी लोग गंदगी नहीं फैलाते। शहर का गंद तो झुग्गी-झोंपड़ियों से है।" तुम्हें क्या लगता है - आपस में बात करो, बहस करो।
Advertisements
Solution
ऐसा सोचना बिल्कुल ही गैलत है कि शहरी लोग गंदगी नहीं फैलाते और शहर की गंदगी झुग्गी-झोपड़ियों से है। दरअसल शहर के लोग अपने घरों को साफ रखने के लिए घर का सारा कूड़ा-कचड़ा रोड पर फेंक देते हैं। जिसके कारण भी बहुत ज्यादा गंदगी फैलती है। सरकार द्वारा शहर में रह रहे लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए नये-नये रोड, नई फैक्ट्रियाँ, आदि बनाने के कारण उन जगहों पर रह रहे लोग विस्थापित हो जाते हैं तथा शहरों में आकर बस जाते हैं, वे गरीब होने के कारण अच्छे मकान तथा अन्य चीजें नहीं खरीद या बनवा पाते हैं एवं एक स्लम (झुग्गी झोपड़ी वाली बस्ती) बन जाता है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
अपनी जगह छोड़कर दूर नई जगह जाकर रहना कैसा लगता होगा?
जात्र्या जैसे परिवार बड़े शहरों में क्यों आते होंगे?
तुम अपने बड़ों से क्या-क्या सीखते हो?
जिन चीज़ों का ज्ञान जात्र्या को खेड़ी में हासिल हुआ, उनमें से कितना उन्हें मुंबई में काम आया होगा?
जात्र्या के खेड़ी के परिवार में कितने लोग थे? जात्र्या जब अपने परिवार के बारे में सोचता तो उसके मन में कौन-कौन आता?
क्या तुमने ऐसे लोगों के बारे में सुना है, जो अपनी पुरानी जगह से हटना पसंद नहीं करते? उनकी कुछ बातें बताओ।
जात्र्याभाई ने क्या सोचकर मुंबई जाने की ठानी? क्या उन्हें मुंबई वैसा ही मिला?
क्या तुम किसी बच्चे या परिवार को जानते हो, जो अपनी जगह से हटाए गए हों? उनसे बात करो।
क्या वे कुछ ऐसी चीज़ें बनाना जानते हैं, जो तुम नहीं जानते? क्या?
जात्र्या के परिवार जैसे लाखों परिवार अलग-अलग कारणों से बड़े शहरों में रहने के लिए जाते हैं। मगर इन बड़े शहरों में उनकी ज़िंदगी क्या पहले से अच्छी होती है? बड़े शहरों में उन्हें किस तरह के अनुभव होते होंगे?
