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Question
किसी कार की छत से l लंबाई का कोई सरल लोलक, जिसके लोलक का द्रव्यमान M है, लटकाया गया है। कार R त्रिज्या की वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल υ से गतिमान है। यदि लोलक त्रिज्य दिशा में अपनी साम्यावस्था की स्थिति के इधर-उधर छोटे दोलन करता है तो इसका आवर्तकाल क्या होगा?
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Solution

कार जब मोड़ पर मुड़ती है तो उसकी गति में त्वरण, `\frac { \upsilon ^{ 2 } }{ "R" }` (अभिकेंद्र त्वरण) होता है। इस प्रकार कार एक अजड़त्वीय निर्देश तंत्र है। इसलिए गोलक पर एक छद्म बल `\frac { "m" \upsilon ^{ 2 } }{ "R" }` वृत्तीय पथ के बाहर की ओर लगेगा जिसके कारण लोलक ऊर्ध्वाधर रहने के स्थान पर थोड़ा तिरछा हो जाएगा।
इस समय गोलक पर दो बले क्रमशः भार mg तथा अपकेंद्र बल `\frac { "m" \upsilon ^{ 2 } }{ "R" }` लगेंगे।
यदि गोलक के लिए g का प्रभावी मान g’ है तो गोलक पर प्रभावी बल mg’ होगा जो कि उक्त दो बलों का परिणामी है।
`∴ "m""g"^"'" = sqrt(("mg"^2) + (("m"upsilon^2)/"R"^2)^2)` ...`["mg" ⊥ ("m"upsilon^2)/"R"]`
अतः `"g"^"'" = sqrt("g"^2 + upsilon^4/"R"^2)`
∴ लोलक का नया आवर्तकाल `"T" = 2pisqrt("l"/"g"^"'")`
`=> "T" = 2pi sqrt("l"/["g"^2 + upsilon^4/"R"^2]^(1//2))`
