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Question
कहानी के उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे गरीबी की विवशता झाँक रही हो।
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Solution
निम्नलिखित प्रसंगों से गरीबी की विवशता झाँक रही है-
- लड़का नंग-धड़ंग पड़ा था। उसके गले तथा छाती की हड्डियाँ साफ़ दिखाई दे रही थी। उसके हाथ-पैर बासी ककड़ियों की तरह सूखे, बेजान पड़े थे और उसका पेट हँडिया की तरह फूला हुआ था।
- बच्चे के मुँह पर अपना एक फटा, गंदा ब्लाउज़ डाल दिया।
- बटलोई की दाल को कटोरे में उँड़ेल दिया, पर वह पूरा भरा नहीं । छिपुली में थोड़ी-सी चने की तरकारी बची थी, उसे पास खींच लिया। रोटियों की थाली को उसने पास खींच लिया, उसमें केवल एक रोटी बची थी। मोटी, भद्दी और जली उस रोटी को वह जूठी थाली में रखने जा रही रही थी कि अचानक कुछ देर तक एकटक देखा, फिर रोटी को दो बराबर टुकड़ों में विभाजित कर दिया। एक टुकड़े को तो अलग रख दिया और दूसरे टुकड़े को अपनी जूठी थाली में रख लिया। तदुपरांत एक लोटा पानी लेकर खाने बैठ गई। उसने पहला ग्रास मुँह में रखा और तब न मालूम कहाँ से उसकी आँखों से आँसू चूने लगे।
- सारा घर मक्खियों से भनभन कर रहा था। आँगन में अलगनी पर एक गंदी साड़ी टँगी थी, जिसमें कई पैबंद लगे हुए थे।
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