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कहा जाता है की राष्ट्र एक व्यापक अर्थ में ‘कल्पित समुदाय’ होता है और सर्वसामान्य विश्वास, इतिहास, राजनितिक और कल्पनाओं से एकसूत्र में बँधा होता है। - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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Question

कहा जाता है की राष्ट्र एक व्यापक अर्थ में ‘कल्पित समुदाय’ होता है और सर्वसामान्य विश्वास, इतिहास, राजनितिक और कल्पनाओं से एकसूत्र में बँधा होता है। उन विशेषताओं की पहचान करें जिनके आधार पर भारत एक राष्ट्र है।

Very Long Answer
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Solution

राष्ट्र के संबंध में विचारकों द्वारा कई मत प्रदान किए गए हैं उनमें से एक अर्थ यह भी है कि राष्ट्र ‘कल्पित समुदाय’ होता है। इस विचार से कुछ लोग सहमत हैं और कुछ इस विचार पर अपनी असहमति दर्ज कराते हैं। वास्तविकता में राष्ट्र को एक कल्पित समुदाय कहना सर्वथा अनुचित है।

राष्ट्र के संबंध-भाव को राष्ट्रीयता के रूप में देखा और समझा जाता है। कुछ तत्त्वोंके आधार पर उत्पन्न हुई किसी एक जन-समूह में एकता की भावना को राष्ट्रीयता कहा जाता है। जिस जन-समूह में यह भावना विद्यमान होती है, और जो इसके आधार पर एक संगठित ढांचे में ढल जाता हे तो वह जन-समूह राष्ट्र का रूप ग्रहण कर लेता है।

  1. भौगोलिक एकता: भौगोलिक एकता राष्ट्रीयता के निर्माण में बहुत महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। राष्ट्र के विकास में सामान्यतः भूमि का बहुत महत्त्व है। जब एक जन-संमूह के लोग किसी एक निश्चित भूमि पर साथ-साथ रहते हैं तो उनमें एकता की भावना पैदा हो जाती है। हम भारतीय, अंग्रेज़ अथवा चीनी हैं, यह भावना एक प्रदेश में रहने के कारण उत्पन्न होती है।
  2. समान नस्ल व जाति: जातीय एकता भी राष्ट्र अथवा राष्ट्रीयता के निर्माण में बहुत सहायक होती है। एक नस्ल व जाति के लोग एक-दूसरे से अपने पन की भावना पाते हैं। उनमें अधिक एकता होती है। प्रत्येक राष्ट्र की ऐतिहासिक उत्पत्ति की पौराणिक कथाएँ होती हैं।
  3. ऐतिहासिक एकता: सामान्य अतीत तथा इतिहास भी राष्ट्र के विकास में बहुत सहायक होता है। इतिहास का प्रत्येक 'जन-समूह के जीवन में बड़ा भावनात्मक, महत्त्व है। इतिहास अतीत तथा भविष्य की एक मजबूत कड़ी है। किसी राष्ट्र की एकता को बनाए रखने में इसका बहुत योगदान है।
  4. सामान्य संस्कृति: सामान्य संस्कृति राष्ट्र के विकास में बहुत सहायक है। संस्कृति मनुष्य के जीवन के अनेक पहलुओं से संबंध रखती है। सामान्य भाषा के कारण लोगों में एकता उत्पन्न होती है। सामान्य भाषा के बिना राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
  5. धर्म की एकता: राष्ट्रों के इतिहास में धर्म का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। धर्म लोगों में एकता का महत्त्वपूर्ण बंधन रहा है। धर्म और राजनीति सदियों तक एक-दूसरे के इतने निकट रहे हैं कि मध्यकालीन युग में राजनीति धर्म पर निर्भर मानी जाती थी।
  6. आर्थिक निर्भरता: आर्थिक निर्भरता भी राष्ट्र के निर्माण में सहायक सिद्ध हुई है। स्टालिन का कहना है कि आर्थिक समानता राष्ट्र का सबसेमहत्त्वपूर्ण तत्त्व है।
  7. सार्वजनिक इच्छा: सार्वजनिक इच्छा से भी राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। यदि लोगों में इकट्ठा रहने की इच्छा ही नहीं हो तो राष्ट्र का निर्माण नहीं होगा।
  8. राजनीतिक एकता: राष्ट्र के निर्माण में राजनीतिक तत्व बहुत सहायक हैं। राजनीतिक एकता लोगों को एकता के सूत्र में बांधती है। स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलनों ने सारे राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांध दिया। लोगों की इस एकता के आगे ब्रिटिश सरकार जैसी अत्याचारी सरकार को भी झुकना पड़ा।
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नए राष्ट्र की चुनौतियाँ
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Chapter 1: राष्ट्र - निर्माण की चुनौतियाँ - प्रश्नावली [Page 25]

APPEARS IN

NCERT Political Science [Hindi] Class 12
Chapter 1 राष्ट्र - निर्माण की चुनौतियाँ
प्रश्नावली | Q 9. | Page 25

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भारत का कोई समकालीन राजनीतिक नक्शा दीजिए (जिसमें राजाओं की सीमाएं दिखाई गई हो) और नीचे लिखी रियासतों के स्थान चिन्ह कीजिए -

  1. जूनागढ़
  2. मणिपुर
  3. ग्वालियर
  4. मैसूर

नीचे दो तरह की राय लिखी गई है:

  1. विस्मय - रियासतों को भारतय संघ में मिलाने से इन रियासतों की प्रजा लोकतंत्र का विस्तार हुआ।
  2. इंद्रप्रीत - यह बात मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। इसमें बल प्रयोग भी हुआ था जबकि लोकतंत्र में आम सहमति से काम किया जाता है।

देसी रियासतों के विलय और ऊपर के मुहावरे के आलोक में इस घटनाक्रम पर आपकी क्या राय है?


निचे 1947 के अगस्त के कुछ बयान दिए गए हैं जो अपनी प्रकृति में अत्यंत भिन्न हैं।

आज आपने - अपने सर पर कांटों का ताज पहना है। सत्ता का आसन एक बुरी चीज है। इस आसन पर आपको बड़ा सचेत रहना होगा.... आपको और ज़्यादा विनम्र और धौर्यवान बनना होगा.... अब लगातार आपकी परीक्षा ली जाएगी।

- मोहनदास करमचंद गांधी

....भारत आज़ादी की जिंदगी के लिए जागेगा हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाएँगे आज दुर्भाग्य के एक दौर का खात्मा होगा और हिंदुस्तान अपने को फिर से या लोग आज हम जो जश्न मना रहे हैं वह एक कदम भर है, संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं....

जवाहरलाल नेहरू

इन दो बयानों से राष्ट्र - निर्माण का जो एजेंडा ध्वनित होता है उसे लिखिए। आपको कौन - सा एजेंडा जँच रहा है और क्यों?


भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाने के लिए नेहरू ने किन तर्कों का इस्तेमाल किया। क्या आपको लगता है कि यह केवल भावनात्मक और नैतिक तर्क हैं अथवा इनमें कोई तर्क युक्तिपरक भी है?


निचे लिखे अवतरण को पढ़िए और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

राष्ट्र - निर्माण के इतिहास के लिहाज से सिर्फ सोवियत संघ में हुए प्रयोगों की तुलना भारत से की जा सकती है। सोवियत संघ में भी विभिन्न और परस्पर अलग - अलग जातीय समूह, धर्म, भाषाई समुदाय और सामाजिक वर्गों के बिच एकता का भाव कायम करना पड़ा। जिस पैमाने पर यह काम हुआ, चाहे भौगोलिक पैमाने के लिहाज से देखें या जनसंख्यागत वैविध्य के लिहाज से,वह अपने आप में बहुत व्यापक हो कहां जाएगा दोनों ही जगह राज्य को जिस कच्ची सामग्री से राष्ट्र निर्माण की शुरुआत करनी थी वह समान रूप से दुष्कर थी। लोग धर्म के आधार पर बैठे हुए और कर्ज तथा बीमारी से दबे हुए थे।

रामचंद्र गुहा

  1. यहाँ लेखक ने भारत और सोवियत संघ के बीच जिन समानताओं का उल्लेख किया है, उसकी एक सूचि बनाइए। इनमे से प्रत्येक के लिए एक उदाहरण दीजिए।
  2. लेखक ने यहां भारत और सोवियत संघ में चली राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया ओ के बीच की और समानता का उल्लेख नहीं किया है क्या आप दो और समानताएं बता सकते हैं?
  3. अगर पीछे मुड़कर देखें तो आप क्या पाते हैं राष्ट्र निर्माण के इन दो प्रयोगों में किसने बेहतर काम किया है और क्यों?

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