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Question
‘क’ स्तम्भे विशेषणपदं लिखितम्, ‘ख’ स्तम्भे पुनः विशेष्यपदम्। तयोः मेलनं कुरुत -
| क स्तम्भ | ख स्तम्भ | ||
| (क) | कश्चित् | (i) | वृषभम् |
| (ख) | दुर्बलम् | (ii) | कृपा |
| (ग) | क्रुद्धः | (iii) | कृषीवलः |
| (घ) | सहस्राधिकेषु | (iv) | आखण्डलः |
| (ङ) | अभ्यधिका | (v) | जननी |
| (च) | विस्मितः | (vi) | पुत्रेषु |
| (छ) | तुल्यवत्सला | (vii) | कृषकः |
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Solution
| क स्तम्भ | ख स्तम्भ | ||
| (क) | कश्चित् | (vii) | कृषकः |
| (ख) | दुर्बलम् | (ii) | वृषभम् |
| (ग) | क्रुद्धः | (iii) | कृषीवलः |
| (घ) | सहस्राधिकेषु | (vi) | पुत्रेषु |
| (ङ) | अभ्यधिका | (ii) | कृपा |
| (च) | विस्मितः | (iv) | आखण्डलः |
| (छ) | तुल्यवत्सला | (v) | जननी |
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‘क’ स्तम्भे दत्तानां पदानां मेलनं ‘ख’ स्तम्भे दत्तैः समानार्थकपदौः कुरुत -
| क स्तम्भ | ख स्तम्भ | ||
| (क) | कृच्छ्रेण | (i) | वृषभः |
| (ख) | चक्षुर्भ्याम् | (ii) | वासवः |
| (ग) | जवेन | (iii) | नेत्राभ्याम् |
| (घ) | इन्द्रः | (iv) | अचिरम् |
| (ङ) | पुत्राः | (v) | द्रुतगत्या |
| (च) | शीघ्रम् | (vi) | काठिन्येन |
| (छ) | बलीवर्दः | (vii) | सुताः |
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
अयम् अन्येभ्यो दुर्बलः।
रेखाङ्कितपद यथास्थानं सन्धिं विच्छेदं वा कुरुत -
तथापि वृषः न + उत्थितः।
रेखाङ्कितपद यथास्थानं सन्धिं विच्छेदं वा कुरुत -
सत्स्वपि बहुषु पुत्रेषु अस्मिन् वात्सल्यं कथम्?
रेखाङ्कितपद यथास्थानं सन्धिं विच्छेदं वा कुरुत -
तथा + अपि + अहम् + एतस्मिन् स्नेहम् अनुभवामि।
अधोलिखित वाक्य रेखांकितं सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम् -
सः दीनः इति जानन् अपि कृषकः तं पीडयति।
अधोलिखित वाक्य रेखांकितं सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम् -
मम बहूनि अपत्यानि सन्ति।
अधोलिखित वाक्य रेखांकितं सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम् -
सः च ताम् एवम् असान्त्वयत्।
