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'जल उठो फिर सींचने को' इस पंक्ति का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

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Question

'जल उठो फिर सींचने को' इस पंक्ति का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

Answer in Brief
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Solution

यह पंक्ति निराशा और दुख से उभरने की प्रेरणा देती है। कवि के अनुसार मनुष्य को निराशा और दुख से उभरने के लिए एक बार फिर प्रयत्नशील होना चाहिए। यह कविता जहाँ उत्साह का संचार करती है, वहीं यह आशा भी बाँधती है कि संघर्ष से लड़कर निकला जा सकता है। अत: कवि लोगों को जीवन में निराशा और दुख से लड़ने के लिए प्रेरित कर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग बताता है।

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गीत गाने दो मुझे
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Chapter 1.02: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति) - प्रश्न-अभ्यास [Page 13]

APPEARS IN

NCERT Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
Chapter 1.02 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति)
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | Page 13
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