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जहाँ पर भाइयों में प्यार का सागर नहीं होता, वो ईंटों का मकाँ होता है, लेकिन घर नहीं होता। जो अपने देश पर कटने का जज़्बा ही न रखता हो, वो चाहे कुछ भी हो सकता है, लेकिन सर नहीं होता। - Hindi [हिंदी]

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Question

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

जहाँ पर भाइयों में प्यार का सागर नहीं होता,
वो ईंटों का मकाँ होता है, लेकिन घर नहीं होता।

जो अपने देश पर कटने का जज़्बा ही न रखता हो,
वो चाहे कुछ भी हो सकता है, लेकिन सर नहीं होता।

जो समझौते की बातें हैं, खुले दिल से ही होती हैं,
जो हम मिलते हैं उनसे, हाथ में खंजर नहीं होता।

हकीकत और होती है, नज़र कुछ और आता है,
जहाँ पर फूल खिलते हैं, वहाँ पत्थर नहीं होता।

जो एक सीमा में रहकर रोशनी देता है 'बेदिल' को,
वो जुगनू हो तो हो, लेकिन कभी दिनकर नहीं होता।

  1. आकलन:
    लिखिए: 
    पद्यांश में उल्लिखित देशभक्ति की भावना व्यक्त करने वाली पंक्तियाँ:     [2]
    1. --------------
    2. --------------
  2. स्वमत-अभिव्यक्ति:
    ‘आपसी प्यार, परिवार का आधार’ विषय पर 25 से 30 शब्दों मेंअपने विचार लिखिए।     [2]
Comprehension
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Solution


    1. जो अपने देश पर कटने का जज़्बा ही न रखता हो। 
    2. वो चाहे कुछ भी हो सकता है, लेकिन सर नहीं होता।
  1. आपसी स्नेह और प्रेम परिवार की एकता को मजबूत करता है। यह संबंधों को इतना मजबूत बना देता है कि संकट की घड़ी में भी परिवार के सदस्य घबराते नहीं, बल्कि धैर्य से हर कठिनाई का सामना करते हैं और दुखों को पीछे छोड़ देते हैं। आपसी प्रेम परिवार को संबल देता है और उसके सदस्यों में आपसी समझ, सहयोग और सम्मान की भावना को बढ़ाता है।
    इसका असर सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज में भी सदस्य विनम्र और सहयोगी व्यवहार करते हैं। आपसी प्रेम न केवल परिवार की नींव को मजबूत करता है, बल्कि उसे समृद्धि, सुख-शांति और सफलता की दिशा में भी आगे बढ़ाता है।

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