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Question
इस कविता में 'लोहे की सड़क' किसके कहा गया है?
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रेलगाड़ी आओ बच्चों खेल दिखाएँ, छुक-छुक करती रेल चलाएँ। सीटी देकर सीट पर बैठो, एक-दूजे की पीठ पर बैठो। आगे-पीछे, पीछे-आगे, लाइन से लेकिन कोई न भागे। सारे सीधी लाइन में चलना, दोनों आँखों मीचे रखना। बंद आँखों से देखा जाए, आँख खुले तो कुछ न पाए।
तड़क-भड़क, लोहे की सड़क, यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ। छुक-छुक, छुक-छुक, लाइट्स आती, पर कर जाती। बालू रेत, आलू का खेत, बाजरा धान, बुड्ढा किसान। हरा मैदान, मंदिर मकान, चाय की दुकान.....
पुल पगडंडी, टीले पे झंडी, पानी का कुंड, पंछी का झुंडा। झोपड़ी-झाड़ी, खेती-बड़ी, बादल धुआँ, मोठ कुआँ। कुएँ के पीछे, बैग बगीचे, धोबी का घाट, मंगल की हाट। गाँव में मेला, भीड़ झमेला, टूटी दीवार, टट्टु सवार...
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Solution
इस कविता में रेल की पटरियों को 'लोहे की सड़क' कहा गया है।
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क्या तुम रेलगाड़ी में बैठे हो? कब-कब?
क्या रेलगाड़ी कहि भी चल सकती है? क्यों?
तुम किस-किस वाहन पर बैठे हो? उनके नाम अपनी कॉपी में लिखो।
बच्चों ने किन-किन वाहनों के नाम लिए?

नीचे लिखी जगहों पर अपने घर से कैसे जाना चाहोगे? वाहन का नाम डिब्बे में लिखो।

नीचे दिए चित्र में कुछ वाहनों के नाम लिखे हैं। तुम्हें हर वाहन को एक तरफ़ उसके पहिए की संख्या से जोड़ना है। दूसरी तरफ़ उसी वाहन को वह जिससे चलता है, उससे जोड़ना है।

बड़ो से पूछ कर पता लगाओ - आज से पचास साल पहले लोग कैसे आते-जाते थे? क्या तब भी यही सब साधन थे?
अगर कोई छुकछुक की आवाज़ करे तो तुम झटपट पहचान ही जाते हो कि वे रेलगाड़ी के लिए कह रहें हैं। क्या तुम इन [आवाजों से वाहन को पहचान सकते हो? लिखों।
| छुक-छुक | रेलगाड़ी |
| पौं-पौं | |
| घर्र-घर्र | |
| पीं-पीं | |
| टप-टप | |
| ट्रिन-ट्रिन |
तुमने सबसे ज़्यादा शोर कहाँ सुना है?
क्या तुम्हें इतना शोर अच्छा लगता है? क्यों?



