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Question
हमें भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की क्यों ज़रूरत है?
Answer in Brief
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Solution
औपचारिक स्तर पर ऋण देनेवालों की तुलना में अनौपचारिक खंड के ज्यादातर ऋणदाता कहीं ज्यादा ब्याज वसूल करते हैं। इस प्रकार अनौपचारिक स्तर पर लिया गया ऋण कर्जदाता को कहीं अधिक महँगा पड़ता है। अधिक ब्याज से कर्जदार की आय का अधिकतर हिस्सा ऋण उतारने में खर्च हो जाता है। इससे ऋण का बोझ बढ़ सकता है। व्यक्ति ऋण के फंदे में जकड़ सकता है। इन सभी कारणों से भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की आवश्यकता है। बैंकों और सहकारी समितियों को ज्यादा कर्ज देना चाहिए। इसके जरिए लोगों की आय बढ़ सकती है, क्योंकि फिर बहुत से लोग अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए सस्ता कर्ज ले सकेंगे। सस्ता और सामर्थ्य के अंदर का कर्ज देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।
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भारत में औपचारिक क्षेत्रक में साख
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