Advertisements
Advertisements
Question
गिल्लू का प्रिय खाद्य क्या था? इसे न पाने पर वह क्या करता था?
Advertisements
Solution
गिल्लू का प्रिय खाद्य काजू था। इसे वह अपने दाँतों से पकड़कर कुतर-कुतरकर खाता रहता था। गिल्लू को जब काजू नहीं मिलता था तो वह खाने की अन्य चीजें लेना बंद कर देता था या उन्हें झूले से नीचे फेंक देता था।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
कौए अपना सुलभ आहार कहाँ खोज रहे थे और कैसे?
लेखिका ने लघु जीव की जान किस तरह बचाई? उसके इस कार्य से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
लेखक को अपने पिटने का भय कब दूर हुआ?
त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों पर प्रकाश डालते हुए अपनी जानकारी के कुछ अन्य घरेलू उद्योगों के विषय में बताइए?
'किताबों वाले कमरे' में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी?
महिसागर नदी के दोनों किनारों पर कैसा दृश्य उपस्थित था? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
रास की जनसभा में गांधी जी ने लोगों को किस तरह स्वतंत्रता के प्रति सचेत किया?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
बुढ़िया के दु:ख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?
भगवाना के इलाज और उसकी विदाई के बाद घर की आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा?
भगवाना कौन था? उसकी मृत्यु किस तरह हुई ?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
लेखिका को किनके साथ चढ़ाई करनी थी?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति कैसी थी?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। मैंने इनको अपने साथ लाए लाल कपड़े में लपेटा, छोटी-सी पूजा-अर्चना की और इनको बर्फ़ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में मुझे अपने माता-पिता का ध्यान आया।
15-16 मई, 1984 की किस घटना से लेखिका को आश्चर्य हुआ?
अतिथि को आया देख लेखक की क्या दशा हुई और क्यों?
लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि अतिथि मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
रामन् को मिलनेवाले पुरस्कारों ने भारतीय-चेतना को जाग्रत किया। ऐसा क्यों कहा गया है?
पाठ में आए रंगों की सूची बनाइए। इनके अतिरिक्त दस रंगों के नाम और लिखिए।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
उबल पड़ने वाले साधारण आदमी का इसमें केवल इतना ही दोष है कि वह कुछ भी नहीं समझता-बूझता और दूसरे लोग उसे जिधर जोत देते हैं, उधर जुत जाता है।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना-भिड़ाना।
