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गवरइया की टोपी पर दर्जी ने पाँच हुँदने क्यों जड़ दिए? - Hindi (हिंदी)

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Question

गवरइया की टोपी पर दर्जी ने पाँच हुँदने क्यों जड़ दिए?

Short/Brief Note
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Solution

गवरइया जब बुनकर द्वारा बुना महीन कपड़ा लेकर दर्जी के पास गई तो उसने दर्जी से कहा कि इस कपड़े से दो टोपियाँ सिल दे। उनमें से एक को अपने पारिश्रमिक के रूप में रख ले। इतनी अच्छी मजूरी मिलने की बात दर्जी सोच भी नहीं सकता था। वह बहुत खुश हुआ। उसने अपनी खुशी से गवरइया की टोपी पर पाँच हुँदने जड़ दिए।

shaalaa.com
गद्य (Prose) (Class 8)
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Chapter 18: टोपी - कहानी से [Page 127]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Vasant Part 3 Class 8
Chapter 18 टोपी
कहानी से | Q 4 | Page 127

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मध्यकाल के इन संत रचनाकारों की अनेक रचनाएँ अब तक आप पढ़ चुके होंगे। इन रचनाकारों की एक-एक रचना अपनी पसंद से लिखिए-

(क) अमीर खुसरो

(ख) कबीर

(ग) गुरू नानक

(घ) रहीम


ब्रिटिश शासन के दौर के लिए कहा गया कि-"नया पूँजीवाद सारे विश्व में जो बाज़ार तैयार कर रहा था उससे हर सूरत में भारत के आर्थिक ढाँचे पर प्रभाव पड़ना ही था" क्या आपको लगता है कि अब भी नया पूँजीवाद पूरे विश्व में जो बाज़ार तैयार कर रहा है, उससे भारत के आर्थिक ढ़ाँचे पर प्रभाव पड़ रहा है? कैसे?


अलग-अलग पक्षी अलग-अलग तरह से घोसला बनाते हैं। तुम कुछ पक्षियों के घोसलों के चित्र इकट्ठे करके उसे अपनी कॉपी पर चिपकाकर शिक्षक को दिखाओ।


गोमा ने अपने खेतों को क्यों जोता?


आधुनकि तकनीक द्वारा भेजे जाने वाले पत्रों के बारे में भी जानकारी प्राप्त करो। जैसे-ई-मेल, फैक्स आदि।


क्या तुम बूढ़ी अम्मा की बात से सहमत होते? अपने उत्तर का कारण भी बताओ।


"इस वर्ष भी आषाढ़ सूखा ही रहा।"

लोककथा से जाहिर होता है कि गोमा के गाँव में तीन साल से वर्षा नहीं हुई थी। वर्षा न होने के कारण उनके गाँव के बैलों, खेतों और पेड़ों में क्या बदलाव आए होंगे?


तुम गीत-गाने, किस्सा-कहानी को सुनने के अलावा फ़िल्में भी देखते होगे। अब तुम पता करो कि– 

(क) लोकगीतों और लोककथाओं को कौन-कौन लोग बनाते और गाते हैं?

(ख) क्या लोककथाओं पर भी नाटक या सिनेमा बना है? कुछ के नाम बताओ।

ऊपर के काम में तुम बड़ों से भी मदद ले सकते हो।


नीचे लिखे वाक्य को अपने ढंग से सार्थक रूप में तुम जिस तरह भी लिख सकते हो वैसे लिखो।

उसने घर की राह पकड़ ली


तेज़ हवाओं के कारण कभी-कभी उन नाविकों के कपड़े उड़/खो जाते थे। मान लो, ऐसा ही एक मोज़ा तुम्हें अपनी कहानी सुनाना चाहता है। वह क्या-क्या बातें बताएगा, कल्पना से उसकी कहानी पूरी करो -

मैं एक मोज़ा हूँ। वैसे तो मैं हमेशा अपने भाई के साथ रहता हूँ।
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इन प्रदेशों में कौन-कौन से आदिवासी रहते हैं? पता करके लिखो?

(क) झारखंड

(ख) छत्तीसगढ़

(ग) उड़ीसा

(घ) मिजोरम

(ङ) अंडमान निकोबार द्वीप समूह


मारिया को किस कार्य के लिए सम्मानित किया गया?


फ़िल्मों में दृश्यों के साथ गीत गाए जाते हैं। फिल्म के अतिरिक्त ऐसे बहुत से अवसर होते हैं जहाँ उसी के अनुकूल गीत भी गाए-बजाए जाते हैं। इस पाठ में भी 'पहली बार विश्व स्तर पर कहीं जन-गण-मन बजा' का उल्लेख हुआ है। तुम फ़िल्मों के कुछ मशहूर गीतों के बोलों की सूची बनाओ जो फ़िल्मों में दृश्यों के साथ तो गाए ही गए हों, जिन्हें विशेष अवसरों पर भी गाया बजाया जाता हो।


अपने जीवन की किसी ऐसी घटना के बारे में बताओ–

  • जब तुम्हारी आँखों में आँसू आए हों।

  • जब तुम अपना दुख-दर्द भूल गए हो।


निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं ? आपस में चर्चा कीजिए, जैसे - "ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।" परिणाम – भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
1. "सच्चाई केवल भीरू और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।" ____________
2. "झूठ और फरेब का रोज़गार करनेवाले फल-फूल रहे हैं।" ____________
3. "हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम।" ____________


''या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।''

''ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।''

इन दोनों पंक्तियों में 'आपा' को छोड़ देने या खो देने की बात की गई है। 'आपा' किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है? क्या 'आपा' स्वार्थ के निकट का अर्थ देता है या घमंड का?


गवरइया और गवरे की बहस के तर्को को एकत्र करें और उन्हें संवाद के रूप में लिखें।


कहानी में मोटे-मोटे किस काम के हैं? किन के बारे में और क्यों कहा गया?


गाँव की बोली में कई शब्दों का उच्चारण अलग होता है। उनकी वर्तनी भी बदल जाती है; जैसे – गवरइया, गौरैया का ग्रामीण उच्चारण है। उच्चारण के अनुसार इस शब्द की वर्तनी लिखी गई है। पूँदना, फुलगेंदा का बदला हुआ रूप है। कहानी में अनेक शब्द हैं जो ग्रामीण उच्चारण में लिखे गए हैं, जैसेमुलुक-मुल्क, खमी-क्षमा, मजूरी-मजदूरी, मल्लार-मल्हार इत्यादि। आप क्षेत्रीय या गाँव की बोली में उपयोग होने वाले कुछ ऐसे शब्दों को खोजिए और उनका मूल रूप लिखिए, जैसे-टेम-टाइम, टेसन/स्टेशन।


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