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फ़्लैशबैक तकनीक और फ़्लैश फ़ॉरवर्ड तकनीक के दो-दो उदाहरण दीजिए। आपने कई फ़िल्मों देखी होंगी। अपनी देखी किसी एक फ़िल्म को ध्यान में रखते हुए बताइए कि उनमें दृश्यों का बँटवारा किन

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Question

फ़्लैशबैक तकनीक और फ़्लैश फ़ॉरवर्ड तकनीक के दो-दो उदाहरण दीजिए। आपने कई फ़िल्में देखी होंगी। अपनी देखी किसी एक फ़िल्म को ध्यान में रखते हुए बताइए कि उनमें दृश्यों का बँटवारा किन आधारों पर किया गया।

Very Long Answer
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Solution

फ़्लैशबैक तकनीक के दो उदाहरण

  • दंगल फिल्म में महावीर फोगाट अपने पुराने जीवन और कुश्ती के सपने को याद करता है। इन पुराने घटनाक्रमों के माध्यम से दर्शकों को उसके अतीत के बारे में जानकारी मिलती है।
  • कभी खुशी कभी ग़म में परिवार से जुड़ी पुरानी घटनाओं को याद करके कहानी के बीते हुए समय को दिखाया गया है। इससे पात्रों के संबंधों और उनके अतीत को समझने में सहायता मिलती है।

फ़्लैश फ़ॉरवर्ड तकनीक के दो उदाहरण

  • ओम शांति ओम में आने वाली घटनाओं की झलक पहले दिखाई जाती है और बाद में कहानी उन घटनाओं तक पहुँचती है।
  • रंग दे बसंती में भी आगे होने वाली घटनाओं के संकेत पहले मिलते हैं। इससे दर्शकों में उत्सुकता बनी रहती है कि आगे क्या होगा।

फिल्म में दृश्यों का बँटवारा

मैंने दंगल फिल्म देखी है। इस फिल्म में दृश्यों का बँटवारा मुख्य रूप से समय, स्थान, पात्रों और घटनाओं के आधार पर किया गया है। जब कहानी का स्थान बदलता है, जैसे घर से अखाड़े या अखाड़े से प्रतियोगिता के स्थान पर जाना, तो नया दृश्य शुरू हो जाता है। इसी प्रकार जब समय या घटना बदलती है, तब भी दृश्यों का विभाजन किया जाता है। फिल्म में महावीर फोगाट और उसकी बेटियों के प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं तथा परिवार से जुड़े दृश्यों को अलग-अलग दिखाया गया है। इससे कहानी क्रमबद्ध और आसानी से समझ आने वाली बनती है। साथ ही, दृश्यों का यह विभाजन दर्शकों की रुचि और उत्सुकता को बनाए रखता है।

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Chapter 10: कथा-पटकथा - पाठ से संवाद [Page 139]

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NCERT Hindi Abhivyakti aur Madhyam Class 11 and 12
Chapter 10 कथा-पटकथा
पाठ से संवाद | Q 1. | Page 139
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