Advertisements
Advertisements
Question
एक पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा ______
Options
एक दिशा में होता है (एकदिशिक)
दो दिशाओं में होता है (द्विदिशिक)
अनेक दिशाओं में होता है (बहुदिशिक)
किसी विशिष्ट दिशा में नहीं होता
Advertisements
Solution
एक पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एक दिशा में होता है (एकदिशिक)
स्पष्टीकरण -
एक पारिस्थितिकी तंत्र में, स्वपोषी सूर्य के प्रकाश में मौजूद ऊर्जा को ग्रहण करते हैं और इसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। अतः ऊर्जा सूर्य से स्वपोषियों की ओर प्रवाहित होती है। स्वपोषी से ऊर्जा शाकाहारी और अपघटक में जाती है। शाकाहारियों से, ऊर्जा अगले पोषी स्तर के जीवों को दी जाती है और इसी तरह आगे भी लेकिन यह कभी भी पीछे की ओर प्रवाहित नहीं होती है। अत: पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशीय होता है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं-
क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव है?
जैव आवर्धन (Biological magnification) क्या है?
क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा?
मानव जब U V किरणों से अत्यधिक प्रभावित हो जाते है तब क्या हो सकता है?
- प्रतिरक्षा तंत्र की क्षति
- फेफड़ों की क्षति
- त्वचा का कैंसर
- आमाशय के अल्सर
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
निम्नलिखित कथन/परिभाषा के लिए एक शब्द का सुझाव दीजिए :
वह भौतिक और जैविक संसार जहाँ हम रहते हैं
निम्नलिखित कथन/परिभाषा के लिए एक शब्द का सुझाव दीजिए :
पारितंत्र के भौतिक कारक जैसे तापमान, वर्षा, पवन और मृदा
निम्नलिखित युग्मों में से गलत युग्म को चुनिए और उसे सही करके लिखिए :
एक पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह दर्शाइए। यह एकदिशिक क्यों होता है? इसका औचित्य बताइए।
