Advertisements
Advertisements
Question
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
विद्या विवादाय धनं मदाय।
Advertisements
Solution
विवादाय, मदाय।
RELATED QUESTIONS
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ पठन्ति।
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ वदतः
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ विकसन्ति
उदाहरणानुसारं शब्दरचनां कुरुत –

यथा-वानराः
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| पत्र | द्वितीया | पत्रम् | पत्रे | पत्राणि |
| फल | ______ | ______ | ______ | ______ |
उचितपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत –
गृहे आनन्दमयं वातावरण ______ भवति।
अधोलिखितश्लोकेभ्यः तृतीयाविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
पुत्राश्च विविधैः शीलैंर्नियोज्याः सततं बुधैः।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः।
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितश्लोकेभ्यः तृतीयाविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
दरिद्रता धौरतया विराजते,
कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।
कदन्नता चोष्णतया विराजते,
कुरूपता शीलतया विराजते।
| ______ | ______ | ______ | ______ |
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| निरधन | तृतीया | निर्धनेन | निर्धनभ्याम् | निर्धनैः |
| धनिक | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| शाखा | तृतीया | शाखाया | शाखाभ्याम् | शाखाभिः |
| रमा | ______ | ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकप्रदत्तपदैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ ते चिरकालात् पंक्तौ तिष्ठन्ति। (आहार)
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
कृषक : ______ सर्वत्र प्रसिद्धः अस्ति।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
कुक्कुरः ______ इतस्ततः भ्रमति।
यथोचितं योजयत –
| पिपीलिका | नरात् |
| देव | वृद्धायाः |
| सैनिक | मधुमक्षिकायाः |
| मधुमक्षिका | सैनिकत् |
| वृद्धा | देवात् |
| नर | पिपीलिकायाः |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
अद्य चिकित्सालयेषु ______ संख्या प्रतिदिनं वर्धते।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
अद्यत्वे ______ जीवनं कष्टमयं जायते।
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानां रचनां कुरुत –

| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
सत्यमेवेश्वरो लोके
सत्ये धर्मः समाश्रितः।
उत्तर

