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छिपकली/तिलचट्टा के दुरभिती भय का सामाजिक अधिगम सिद्धांतकार किस प्रकार स्पष्टीकरण करेगा? इसी दुर्भीति का एक मनोविश्लेषक किस प्रकार स्पष्टीकरण करेगा?

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Question

छिपकली/तिलचट्टा के दुरभिती भय का सामाजिक अधिगम सिद्धांतकार किस प्रकार स्पष्टीकरण करेगा? इसी दुर्भीति का एक मनोविश्लेषक किस प्रकार स्पष्टीकरण करेगा?

Answer in Brief
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Solution

छिपकली/तिलचटा आदि से होने वाले भय को दुर्भीति कहते हैं। जिन लोगों को दुर्भीति होती है उन्हें किसी विशिष्ट वस्तु, लोग या स्थितियों के प्रति अविवेकी या अर्वक भय होता है। यह बहुधा दुश्चिता विकार से उत्पत्र होती है। दुर्भीति या अविवेकी भय के उपचार के लिए वॉल्प द्वारा प्रतिपादित क्रमिक विसंवेदनीकरण एक तकनीक है। छिपकली/तिलचटा के दुर्भीति भय वाले व्यक्ति का साक्षात्कार मनोविश्लेषक भय उत्पन्न करने वाले उद्दीपको का एक पदानुक्रम तैयार करता है। तथा सेवार्थी को विश्रांत करता है। और सबसे कम दुश्चिता उत्पन्न करने वाली स्थिति के बारे में सोचने को कहता है। सेवार्थी से कहा जाता है की उसे वर्तमान में ही तनाव है और उसको इसकी विपरीत अवस्था में जाना है। उसे कहा जाता है की जरा - सा भी तनाव महसूस करने पर भयानक स्थिति के बारे में बंद कर दे। कई सत्रों के पश्चित सेवार्थी विश्रांति की अवस्था बनाए रखते तीव्र भय उत्पत्र करने वाली स्थितियो के बारे में सोचने में समर्थ हो जाता है। यहाँ अन्योन्य प्रावरोध का सिद्धांत क्रियाशील होता है। पहले विश्रांति की अनुक्रिया विकसित की जाती है तत्पश्चात धीरे से दुश्चिता उत्पत्र करने वाले दद्श्य की कल्पना की जाती है और विश्रांत से दुश्चिता पर विजय प्राप्त की जाती है। इसके अतिरिक्त मनोविश्लेषक सौम्य तथा बिना धमकी वाले किन्तु सेवार्थी के दुर्भाति भय का खंडन करने वाले प्रश्न करता है। ये प्रश्न सेवार्थी को दुर्भीति भय की विपरीत दिशा में सोचने को बाध्य करते है जो दुश्चिता को घटती है। सामाजिक अधिगम सिद्धांतकार सामाजिक पक्षों को पर्यावरण परिवर्तन द्वारा स्पष्ट करेगा।

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चिकित्सा के प्रकार
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Chapter 5: चिकित्सा उपागम - समीक्षात्मक प्रश्न [Page 111]

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NCERT Manovigyaan [Hindi] Class 12
Chapter 5 चिकित्सा उपागम
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 9. | Page 111
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