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Question
“बरसे बदरिया सावन की।”
इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। क्या आपको कोई विशेष बात दिखाई दी?
इस पंक्ति में 'बरसे' और 'बदरिया' दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों 'ब' वर्ण से शुरू हो रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस पंक्ति में 'ब' वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इस कारण यह पंक्ति और भी अधिक सुंदर बन गई है। पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
Very Long Answer
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Solution
पहला पद
- मोहनि मूर्ति साँवरी सूति, नैना बने विशाल: यहाँ 'म' वर्ण (मोहनि–मूर्ति) तथा 'स' वर्ण (साँवरी–सूति) की आवृत्ति है।
- अधर सुधा रस मुरली राजति: यहाँ 'र' वर्ण की आवृत्ति है (रस–राजति)।
- क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित: यहाँ 'ट' वर्ण की आवृत्ति है (कटितट)।
- मीरा के प्रभु संतन सुखदाई: यहाँ 'स' वर्ण की आवृत्ति है (संतन–सुखदाई)।
दूसरा पद
- सावन की मन भावन की: यहाँ 'न' वर्ण की आवृत्ति है (सावन–मन–भावन)।
- सावन में उमग्यो मेरो मनवा: यहाँ 'म' वर्ण की आवृत्ति है (में–मेरो–मनवा)।
- उमड़ घुमड़: यहाँ 'मड़' ध्वनि की आवृत्ति है।
- "दामिन दम कै झर लावन की: यहाँ 'द' वर्ण की आवृत्ति है (दामिन–दम)।
- नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे: यहाँ 'न' वर्ण (नन्हीं–नन्हीं) तथा 'ब' वर्ण (बूँदन–बरसे) की आवृत्ति है।
- मीरा के प्रभु गिरधरनागर, आनंद मंगल गावन की: यहाँ 'ग' वर्ण की आवृत्ति है (गिरधरनागर–गावन)।
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