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बिना ईमानदारी और साहस के आत्मकथा नहीं लिखी जा सकती। गांधी जी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ पढ़कर पता लगाइए कि उसकी क्या-क्या विशेषताएँ हैं?

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Question

बिना ईमानदारी और साहस के आत्मकथा नहीं लिखी जा सकती। गांधी जी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ पढ़कर पता लगाइए कि उसकी क्या-क्या विशेषताएँ हैं?

Very Long Answer
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Solution

महात्मा गांधी की आत्मकथा (सत्य के प्रयोग) आत्मकथा-साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति है। इसे पढ़कर स्पष्ट होता है कि आत्मकथा लिखने के लिए ईमानदारी और साहस का होना बहुत आवश्यक है।

“सत्य के प्रयोग” की प्रमुख विशेषताएँ

  1. पूर्ण ईमानदारी: गांधी जी ने अपने जीवन की सफलताओं के साथ-साथ अपनी गलतियों और कमजोरियों का भी निष्पक्ष वर्णन किया है।उन्होंने कोई बात छिपाने का प्रयास नहीं किया।
  2. सत्य के प्रति निष्ठा: पूरी आत्मकथा सत्य की खोज और उसके प्रयोगों पर आधारित है। उन्होंने जीवन के प्रत्येक अनुभव से सीख लेने का प्रयास किया।
  3. साहसपूर्ण आत्मस्वीकृति: गांधी जी ने अपने बचपन की भूलों, झूठ बोलने, चोरी करने और अन्य कमजोरियों का भी निडर होकर उल्लेख किया है। अपनी कमियों को स्वीकार करने का उनका साहस प्रेरणादायक है।
  4. सरल और सहज भाषा: आत्मकथा की भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जिससे पाठक आसानी से जुड़ जाते हैं।
  5. प्रेरणादायक जीवन-दर्शन: इसमें सत्य, अहिंसा, आत्मसंयम, सेवा और नैतिकता जैसे मूल्यों का महत्व बताया गया है।
  6. आत्मविश्लेषण: गांधी जी केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करते, बल्कि उनका विश्लेषण भी करते हैं और उनसे मिली सीख को साझा करते हैं।
  7. शिक्षाप्रद एवं प्रेरक: यह पुस्तक पाठकों को अपने जीवन में सत्य, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है।
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Chapter 4: जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य - प्रश्न-अभ्यास [Page 20]

APPEARS IN

NCERT Hindi Kshitij Bhag 2 [English] Class 10
Chapter 4 जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
प्रश्न-अभ्यास | Q 2. | Page 20
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