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Question
“बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।”
कुंडलिया में जो बातें सैकड़ों साल पहले कही गई थीं, क्या वे आपके लिए भी उपयोगी हैं? कैसे? उदाहरण देकर समझाइए।
Very Long Answer
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Solution
हाँ, कुंडलिया में कही गई बातें आज भी मेरे लिए पूरी तरह उपयोगी हैं। ये बातें नीति और सदाचरण की हैं, जो हर ज़माने में सही रहती हैं, इसलिए सैकड़ों साल बीत जाने पर भी इनका महत्व कम नहीं हुआ।
उदाहरण:
- पहली कुंडलिया से सीख: परीक्षा में बिना तैयारी के (बिना विचारे) उत्तर लिखने पर कागज़ खराब हो जाता है, कम अंक आते हैं, लोग हँसते हैं और हमें पछताना पड़ता है। इसी तरह बिना सोचे-समझे खरीदारी करने या किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने पर भी नुकसान उठाना पड़ता है।
- दूसरी कुंडलिया से सीख: परीक्षा में एक पेपर अच्छा न होने पर उसकी चिंता छोड़कर अगले पेपर की तैयारी में जुट जाना चाहिए “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ”। जो बात सहज रूप से बनती है, उसी में मन लगाना चाहिए। इससे मन शांत रहता है और आगे का सुख मिलता है।
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