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Question
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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“बहुत देर तक हम दोनों रोते रहे। फिर मौसी ने ही साहस किया और मुझे भी चुप कराया। उसके बाद मौसी ने पहली बार सारी घटना मुझे विस्तारपूर्वक बतलाई। मैं किसी से नहीं मिली। तुम्हारा मौसेरा भाई (मौसी का बेटा, दिलीप) भी मिलने और माफी माँगने पहुँचा था परंतु में उससे मिली ही नहीं। अब मेरा शव ही इस गेट से बाहर जाएगा। तुम्हें जब कभी समय मिले; यहीं आकर मिलते रहना। कभी-कभी अपनी पत्नी को भी लाना। अब जाओ, बहुत विलंब हो गया।” गाड़ी में बैठते ही रघुनाथ अतीत में पहुँच गया। मेरी माँ मिलकर दो बहनें ही थीं। मेरा कोई मामा नहीं था। मेरी माँ बड़ी थीं। मेरे नाना एक खाते-पीते किसान थे। उन्होंने अपनी दोनों बेटियों का विवाह कॉलेज में पढ़ते दो विद्यार्थियों से ही कुछ साल के अंतराल पर किया था। मेरे पिता जी बी.ए. करने के बाद अपने गाँव में खेती-बाड़ी सँभालने लगे थे। मौसा पढ़ने में प्रतिभाशाली थे। वे अंतत: आई.ए.एस. की प्रतियोगिता परीक्षा में सफल हो गए। मौसा जब गुजरात में जिलाधिकारी थे तो नाना का देहांत हुआ था। नानी पहले ही जा चुकी थीं। नाना का श्राद्ध बहुत बड़ा हुआ था। श्राद्ध का पूरा खर्च मौसी ने ही किया था। मेरी माँ की उसने एक नहीं सुनी थी। नाना की संपत्ति का अपना हिस्सा भी मौसी ने मेरी माँ को लिखकर सौंप दिया था। कुछ दिनों के बाद मेरे पिता जी नाना के ही गाँव में आकर बस गए। अब हम लोगों का गाँव नाना का गाँव ही है। इसलिए मौसी से संबंध कुछ अधिक ही गाढ़ा है। मेरी पढ़ाई-लिखाई में भी मौसी का ही योगदान है। मौसी का बेटा दिलीप हमसे आठ बरस छोटा था। वह अपने माँ-बाप की इकलौती संतान था। वह पढ़ने में मौसा की तरह ही काफी प्रतिभावान था। |
- संजाल पूर्ण कीजिए: (२)

- उपर्युक्त गद्यांश में आए हुए शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए: (२)
- .....................
- .....................
- .....................
- .....................
- ‘माँ के चरणों में स्वर्ग होता है’ इस कथन पर ४० से ५० शब्दों में अपना मत लिखिए। (२)
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Solution

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- कभी-कभी
- खाते-पीते
- खेती-बाड़ी
- पढ़ाई-लिखाई
- ‘माँ’ संसार का सबसे मधुर और प्रिय शब्द माना जाता है। कहा जाता है कि माँ के चरणों में ही स्वर्ग का वास होता है। माँ का स्थान देवताओं से भी ऊँचा है और वह हमारे लिए भगवान के समान होती है। माँ के चरणों को छूने से बल, बुद्धि, विद्या और दीर्घायु प्राप्त होती है। माँ अनेक कष्ट सहकर अपने बच्चे को जन्म देती है और फिर अपने प्रेम और स्नेह से उसका पालन-पोषण करती है। वह अपने बच्चे की खुशी के लिए अपना सब कुछ त्यागने को तत्पर रहती है। माँ के आशीर्वाद में अपार शक्ति होती है, जिसकी बदौलत इंसान जीवन में अनेक सुख-सुविधाएँ प्राप्त करता है। चाहे कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, माँ के चरणों में सिर झुकाना उसके लिए सबसे बड़ा सुख होता है।
