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भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात कृषि विकास की महत्त्वपूर्ण नीतियों का वर्णन करें। - Geography (भूगोल)

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Question

भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात कृषि विकास की महत्त्वपूर्ण नीतियों का वर्णन करें।

Long Answer
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Solution

स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले भारतीय कृषि एक जीविकोपार्जी अर्थव्यवस्था जैसी थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार का मुख्य उद्देश्य खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ाना था जिसके लिए निम्न उपाय अपनाए गए – 

  • व्यापारिक फसलों के स्थान पर खाद्यान्न फसलों को उगाना,
  • कृषि गहनता को बढ़ाना तथा
  • कृषियोग्य बंजर तथा परती भूमि को कृषि भूमि में परिवर्तित करना। प्रारंभ में इस नीति से खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ा, लेकिन 1950 के दशक के अंत तक कृषि उत्पादन स्थिर हो गया था। इस समस्या से निपटने के लिए गहन कृषि जिला कार्यक्रम (IADP) तथा गहन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम, (IAAP) प्रारंभ किए गए। किंतु 1960 के दशक के मध्य में दो अकालों से देश में अन्न संकट उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप, दूसरे देशों से खाद्यान्नों का आयात करना पड़ा। साथ ही खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अन्य उपाय भी किए गए; जैसे
  1. मैक्सिको से गेहूँ तथा फिलीपींस से चावल की अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्में मँगवाई गयीं। पैकेज प्रौद्योगिकी के रूप में सबसे पहले पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश व गुजरात के सिंचाई वाले क्षेत्रों में इन उच्च उत्पादकता वाली किस्मों (HYV) को अपनाया गया। कृषि विकास की इस नीति से खाद्यान्नों के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई जिसे हरित क्रांति नाम दिया गया। इस क्रांति ने कृषि में निवेश को प्रोत्साहन दिया जिसमें उर्वरकों, कीटनाशकों, कृषि यंत्रों, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिला। 1980 के बाद यह प्रौद्योगिकी मध्य भारत तथा पूर्वी भारत के भागों तक फैल गयी।
  2. योजना आयोग ने 1988 में कृषि विकास में प्रादेशिक संतुलन को प्रोत्साहित करने हेतु कृषि जलवायु नियोजन आरंभ किया जिसमें कृषि, पशुपालन तथा जल कृषि के विकास पर बल दिया गया।
  3. 1990 के दशक में उदारीकरण नीति तथा उन्मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था ने भारतीय कृषि विकास को प्रभावित किया है। इससे ग्रामीण अवसंरचना विकास में कमी, फसलों के समर्थन मूल्यों तथा बीजों, कीटनाशकों व रासायनिक उर्वरकों पर छूट में कटौती की गई है। फिर भी भारतीय कृषि से उच्च उत्पादकता का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है।
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भारत में कृषि भू-उपयोग
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