English

भारत और मैक्सिको दोनों ही देशों में एक खास समय तक एक पार्टी का प्रभुत्व रहा। बताएँ की मैक्सिको में स्थापित एक पार्टी का प्रभुत्त्व कैसे भारत के एक पार्टी के प्रभुत्त्व से अलग था? - Political Science (राजनीति विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

Question

भारत और मैक्सिको दोनों ही देशों में एक खास समय तक एक पार्टी का प्रभुत्व रहा। बताएँ की मैक्सिको में स्थापित एक पार्टी का प्रभुत्त्व कैसे भारत के एक पार्टी के प्रभुत्त्व से अलग था?

Long Answer
Advertisements

Solution

मैक्सिको में स्थापित एक पार्टी का प्रभुत्व भारत के एक पार्टी के प्रभुत्व से अलग था। भारत में एक पार्टी का प्रभुत्व लोकतान्त्रिक स्थितियों में कायम हुआ। दूसरी ओर, मैक्सिको में एक पार्टी का प्रभुत्व लोकतंत्र की कीमत पर कायम हुआ। भारत में कांग्रेस पार्टी के साथ - साथ शुरू से ही अनेक पार्टियाँ चुनाव में राष्ट्रिय स्तर और क्षेत्रीय स्तर के रूप में भाग लेती रही, परन्तु मैक्सिको में ऐसा नहीं हुआ। मैक्सिको में सिर्फ एक पार्टी पी. आर. आई. का लगभग 60 वर्षो तक वर्चस्व रहा। कांग्रेस पार्टी को पहले तीन चुनाव में भारी बहुमत मिला क्योंकि उसने देश के संघर्ष के लिए 1885 से 1947 तक भूमिका निभाई। उसके सामने दूसरा कोई राजनैतिक दल पूर्ण आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम लेकर उपस्थित नहीं हुआ। भारतीय साम्यवादी दल भी अपनी कुछ आर्थिक नीतियों के कारण देश के 565 देशी रियासतों के शासको, हजारो जमींदारी, जागीरदारों, पूँजीपतियों और यहां तक की मिल्कियत लिए हुए धार्मिक नेताओं एवं बड़े किसानों की लोकप्रिय पार्टी नहीं बन सकी। अनेक राजनैतिक स्वतंत्रता प्रेमियों, प्रैस और मिडिया की पूर्ण स्वतंत्रता के पक्षधर पूँजीवादी या मिश्रित अर्थव्यवस्था जैसी प्रणालियों के समर्थकों का भी ह्रदय जितने में वह असफ़ल रही। 'इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी (स्पेनिश में इसे पी. आर. आई. कहा जाता है) का मैक्सिको में लगभग साठ वर्षों तक शासन रहा। इस पार्टी की स्थपना 1929 में हुई थी। तब इसे नेशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी कहा जाता था। इसे मैक्सिको क्रांति की विरासत हासिल थी। मूल रूप से पी. आर. आई. में राजनेता और सैनिक - नेता, मजदूर और किसान संगठन तथा अनेक राजनितिक दलों समेत कई किस्म के हितों का संगठन था। समय बीतने के साथ पी. आर. आई. के संस्थापक प्लूटाकों इलियास कैलस ने इसके संगठन पर कब्जा जमा लिया और इसके बाद नियमित रूप से होने वाले चुनावों में हर बार पी.आर.आई. ही विजयी पार्टियां बस नाम की थी ताकि शासक दल को वैधता मिलती रहे।' चुनाव के नियम इस तरह तय किए गए की पी.आर.आई. की जीत हर बार पक्की हो सके। शासक दल ने अक्सर चुनाव में हेर - फेर और धांधली की। पी.आर.आई. के शासक को 'परिपूर्ण तानाशाही' कहा जाता है। आख़िरकार सन २००० में हुए राष्ट्र्पति पद के चुनाव में यह पार्टी हारी। मैक्सिकों अब एक पार्टी के दबदबे वाला देश नहीं रहा। बहरहाल, अपने दबदबे के दौर में पी.आर.आई. ने जो दावं - पेंच अपनाए थे उनका लोकतंत्र की सेहत पर पड़ा खराब असर पड़ा हैं। मुक्त और निष्पक्ष चुनाव की बात पर अब भी नागरिकों का पूरा विश्वास नहीं जम पाया है।

shaalaa.com
विपक्षी पार्टियों का उद्भव
  Is there an error in this question or solution?

RELATED QUESTIONS

सही विकल्प को चुनकर खाली जगह को भरें:

______ स्वतंत्र पार्टी का एक निर्देशक सिद्धांत था।


एकल पार्टी के प्रभुत्व के बारे में यहाँ एक बयान लिखे गए हैं। बयान के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ:

विकल्प के रूप में किसी मजबूत राजनितिक दल का अभाव एकल पार्टी - प्रभुत्व का कारण था।


एकल पार्टी के प्रभुत्व के बारे में यहाँ एक बयान लिखे गए हैं। बयान के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ:

एकल पार्टी - प्रभुत्व का संबंध राष्ट्र के औपनिवेशिक अतीत से है।


एकल पार्टी के प्रभुत्व के बारे में यहाँ एक बयान लिखे गए हैं। बयान के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ:

एकल पार्टी - प्रभुत्व से देश में लोकतान्त्रिक आदर्शो के अभाव की झलक मिलती है।


क्या एकल पार्टी प्रभुत्व की प्रणाली का भारतीय राजनीति के लोकतान्त्रिक चरित्र पर खराब असर हुआ?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×