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बालक बच गया बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों के विकास में 'रटना' बाधक है- कक्षा में संवाद कीजिए।

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Question

बालक बच गया

बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों के विकास में 'रटना' बाधक है- कक्षा में संवाद कीजिए।

Answer in Brief
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Solution

बालक की स्वाभाविक प्रृवत्तियों के विकास में रटना बाधक है। रटी हुई अध्ययन सामग्री कुछ समय में दिमाग से निकल जाती है। परन्तु जिसको अध्ययन करके समझा जाए और ध्यानपूर्वक पढ़ा जाए, वह जानकारी लंबे समय तक याद रह पाती है। रटने से बच्चा सीखता नहीं है। वह सभी विषयों की जानकारी का गहराई से अध्ययन नहीं करता। परिणाम वह बस तोते के समान बन जाता है। चीज़ों के पीछे छिपी गहराई उसे स्पष्ट नहीं हो पाती। वह तो बस रटकर ही अपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण कर देता है। जैसे गणित में यदि रटकर जाया जाए, तो प्रश्न हल नहीं किए जा सकते। जब तक उनका अभ्यास न किया जाए और उसके पीछे छिपे समीकरण को हल करना नहीं सीखा जाए, तब तक गणित अनबुझ पहेली के समान ही होता है। ऐसे ही विज्ञान अन्य विषयों में है। इसमें बच्चा अपनी बौद्धिक क्षमता का विकास नहीं करता मात्र जानकारियाँ रट लेता है। हम जितना मस्तिष्क से काम लेते हैं, वह उतना ही विकसित होता है। उसका विषय क्षेत्र बढ़ता नहीं है। अतः चाहिए कि रटने के स्थान पर समझने का प्रयास करें और विचार-विमर्श करके ही अध्ययन करें।

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पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी
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Chapter 2.02: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके) - प्रश्न-अभ्यास [Page 86]

APPEARS IN

NCERT Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
Chapter 2.02 पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (सुमिरिनी के मनके)
प्रश्न-अभ्यास | Q (क) 1. | Page 86
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