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Question
अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दचित्र खींचिए।
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Solution
प्रातःकाल सूर्योदय से पहले पूर्व दिशा लालिमा से आच्छादित हो जाती है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे चारों ओर गुलाल बिखर गया हो। मंद और शीतल हवाएँ चलने लगती हैं, जिससे वृक्ष लहराने लगते हैं। विभिन्न रंगों के पक्षी मधुर स्वर में चहचहाते हुए शाखाओं पर इधर-उधर उड़ते और फुदकते हैं। किसान अपने खेतों की ओर प्रस्थान करते हैं। पशु-पक्षियों और मनुष्यों में नई ऊर्जा का संचार होता है तथा समस्त वातावरण जीवंत हो उठता है।
दिन के ढलने पर पश्चिम दिशा सूर्यास्त की लालिमा से रंग जाती है। सूर्य किसी थके हुए यात्री की तरह धीरे-धीरे क्षितिज में समाने लगता है। पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटते हैं और दिनभर परिश्रम करने वाले किसान भी अपने घरों का रुख करते हैं। सूर्य की बदलती हुई लालिमा यह आभास कराती है मानो वह विश्राम के लिए जा रहा हो। उसके साथ ही समस्त जीव-जगत भी अपने कार्यों को समाप्त कर आराम की तैयारी में लग जाता है।
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भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
नयी कविता में कोष्ठक, विराम चिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता है। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? समझाइए।
सूर्योदय का वर्णन लगभग सभी बड़े कवियों ने किया है। प्रसाद की कविता ‘बीती विभावरी जाग री’ और अज्ञेय की ‘बावरा अहेरी’ की पंक्तियाँ आगे बॉक्स में दी जा रही है। ‘उषा’ कविता के समानांतर इन कविताओं को पढ़ते हुए नीचे दिए गए बिंदुओं पर तीनों कविताओं का विश्लेषण कीजिए और यह भी बताइए कि कौन-सी कविता आपको ज़्यादा अच्छी लगी और क्यों?
- उपमान
- शब्दचयन
- परिवेश
| बीती विभावरी जाग री!
अंबर पनघट में डुबो रही-
खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा,तारा-घट ऊषा नागरी। किसलय का अंचल डोल रहा, लो यह लतिका भी भर लाई-
अधरों में राग अमंद पिए,
मधु मुकुल नवल रस गागरी। अलकों में मलयज बंद किए-
तू अब तक सोई है आली
आँखों में भरे विहाग री। -जयशंकर प्रसाद |
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भोर का बावरा अहेरी - सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन ‘अज्ञेय’ |
शमशेर की कविता ‘उषा’ गाँव के जीवन का जीवांत चित्रण है। पुष्टि कीजिए।
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए।
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प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे भोर का नभ राख से लीपा हुआ चौका बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से स्लेट पर या लाल खड़िया चाक नील जल में या किसी की और... जादू टूटता है इस उषा का अब |
(i) नील जल में किसी की गौर, झिलमिल देह जैसे हिल रही हो में कौन-सा भाव है? (1)
(क) तरलता का
(ख) निर्मलता का
(ग) उज्ज्वलता का
(घ) सहजता का
(ii) नीले नभ में उदय होता हुआ सूर्य किसके जैसा प्रतीत हो रहा है? (1)
(क) शंख जैसा
(ख) गौरवर्णीय सुंदरी जैसा
(ग) सिंदूर जैसा
(घ) नीले जल जैसा
(iii) इस काव्यांश में कवि ने उषा का कौन-सा चित्र उपस्थित किया है? (1)
(क) छायाचित्र
(ख) रेखाचित्र
(ग) शब्दचित्र
(घ) भित्तिचित्र
(iv) अलंकार की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सही है? (1)
| (क) | बहुत नीला शंख जैसे | उपमा अलंकार |
| (ख) | जादू टूटता है इस उषा का अब | उत्प्रेक्षा अलंकार |
| (ग) | सूर्योदय हो रहा है | रूपक अलंकार |
| (घ) | गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो | अन्योक्ति अलंकार |
(v) कवि द्वारा भोर को राख का लीपा हुआ चौंका कहना प्रतिपादित करता है कि भोर का नभ - (1)
(क) अपनी आभा से चमत्कृत कर रहा है।
(ख) रात के समान गर्म हवा फैला रहा है।
(ग) सफ़ेद व नीले वर्णों का अद्भुत मिश्रण है।
(घ) नए परिवर्तन व आयामों का प्रतीक है।
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए:
'उषा' कविता में 'भोर के नभ' की तुलना किससे और क्यों की गई है?
