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अक्षांश और पृथ्वी के अक्ष का झुकाव किस प्रकार पृथ्वी की सतह पर प्राप्त होने वाली विकिरण की मात्रा को प्रभावित करते हैं?

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Question

अक्षांश और पृथ्वी के अक्ष का झुकाव किस प्रकार पृथ्वी की सतह पर प्राप्त होने वाली विकिरण की मात्रा को प्रभावित करते हैं?

Answer in Brief
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Solution

सूर्य की किरणें 0° अक्षांश या विषुवत रेखा पर सालों भर लंबवत पड़ती हैं। 0° अक्षांश से 23\(\frac { 1 }{ 2 }\)° उतरी और 23\(\frac { 1 }{ 2 }\)° दक्षिणी अक्षांशों के बीच सूर्य ऊपर-नीचे होता। रहता है। 21 मार्च से 21 जून तक सूर्य उत्तरायन होता है अर्थात् कर्क रेखा पर सूर्य की किरणें लंबवत रूप से पड़ती हैं और यहाँ पर उस वक्त ग्रीष्म ऋतु होती है और मकर रेखा पर शीत ऋतु होती हैं। 23 सितंबर से 22 दिसंबर तक सूर्य दक्षिणायन होता है अर्थात् मकर रेखा पर सूर्य की किरणें लंबवत पड़ती हैं और यहाँ पर उस वक्त ग्रीष्म ऋतु होती है और कर्क रेखा पर शीत ऋतु होती है। 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लंबवत पड़ती है। कर्क रेखा के उत्तर में और मकर रेखा के दक्षिण में जैसे-जैसे हम बढ़ते जाते हैं, वहाँ का तापमान घटता जाता है। इसलिए 66° उत्तरी अक्षांश और 66° दक्षिण अक्षांश के ऊपरी भाग में शीत कटिबंध पाया जाता है। जहाँ पर वर्ष भर तापमान निम्न रहता है। इस क्षेत्र में वर्ष के अधिकांश महीनों में बर्फ जमी रहती है। इसका मुख्य कारण है कि यहाँ पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं। इस प्रकार अक्षांश और पृथ्वी के अक्ष का झुकाव पृथ्वी की सतह पर प्राप्त होने वाली विकिरण की मात्रा को प्रभावित करते हैं।

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वायुमंडल का तापन एवं शीतलन
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Chapter 8: सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान - अभ्यास [Page 87]

APPEARS IN

NCERT Bhautik Bhugol ke Mool Sidhant [Hindi] Class 11
Chapter 8 सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान
अभ्यास | Q 3. (i) | Page 87
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