Advertisements
Advertisements
Question
अधोलिखितम् सन्दर्भप्रसङ्गाभ्यां सह व्याख्यां कुरुत।
“स्वस्यैवाविनयस्य फलम् अनेनानुभूयते” इत्यवोचत्।
Translate
Advertisements
Solution
- सन्दर्भः प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘सुवर्णकाकः’ (कथासरित्सागर से उद्धृत) नामक पाठ से लिया गया है। यह वाक्य उस समय कहा गया है जब लोभी वृद्धा (कौए की माँ) ने सोने के घड़े के लालच में कौए से सबसे बड़ी पेटी मांगी और उसे खोलने पर उसमें से सांप निकला।
- प्रसङ्गः इस वाक्य के माध्यम से यह बताया गया है कि जब व्यक्ति लोभ में अंधा होकर गलत काम करता है, तो उसे अपने ही कुकृत्यों या गलत व्यवहार का परिणाम भोगना पड़ता है।
- व्याख्या: जब लोभी बुढ़िया ने सोने की पेटी को खोला, तो उसमें से कोई कीमती वस्तु निकलने के बजाय एक भयानक काला सांप निकला। तब कौए ने कहा - “स्वस्यैवाविनयस्य फलम् अनेनानुभूयते”। अर्थात्, “इसने (बुढ़िया ने) अपने ही अविनय (अशिष्ट व्यवहार, लोभ या गलत आचरण) का फल भोगा है।” कौए का तात्पर्य यह था कि बुढ़िया ने अपने लालच के कारण अनैतिक तरीका अपनाया था। सोने के घड़े के लोभ में उसने अनुचित कर्म किया, और यह सांप रूपी दंड उसके अविनय का ही सीधा परिणाम था।
shaalaa.com
Is there an error in this question or solution?
