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Question
अभिकथन (A): मुद्रा की प्रकृति नाशवान है तथा सामान्यतः यह किसी भी समय पर सभी द्वारा स्वीकृत की जाती है।
कारण (R): मुद्रा मूल्य के भंडार के रूप में कार्य करती है, जो कि व्यक्तियों को वर्तमान से भविष्य में क्रय शक्ति स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान करती है।
Options
अभिकथन (A) तथा कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
अभिकथन (A) तथा कारण (R) दोनों सत्य हैं, परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
अभिकथन (A) सत्य है, परन्तु कारण (R) असत्य है।
अभिकथन (A) असत्य है, परन्तु कारण (R) सत्य है।
MCQ
Assertion and Reasoning
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Solution
अभिकथन (A) असत्य है, परन्तु कारण (R) सत्य है।
स्पष्टीकरण:
- कथन (A) त्रुटिपूर्ण है। मुद्रा नाशवान नहीं होती; यह टिकाऊ होती है, इसका भंडारण खर्च कम होता है और सामान्यतः विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार्य रहती है।
- कारण (R) सही है। मुद्रा का एक प्रमुख कार्य मूल्य का भंडारण (store of value) करना है, जो लोगों को वर्तमान से भविष्य में क्रय‑शक्ति स्थानांतरित करने की अनुमति देता है यद्यपि इसकी उपयोगिता खरीदी‑शक्ति के स्थिर रहने पर निर्भर करती है।
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