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Question
आपने पढ़ा है कि “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय...।” कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे एक बड़ा निर्णय लिया है। वह निर्णय क्या था और उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे में एक रोचक कहानी अपने साथियों के साथ मिलकर बनाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
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Solution
“बिना सोचे लिया निर्णय”
मेरा मित्र राहुल हमेशा मेहनती और अच्छा छात्र था। वार्षिक परीक्षा से ठीक पाँच दिन पहले उसके मोहल्ले में मेला लगा। उसके चाचा ने मज़ाक में कहा, “आ जा, दुकान पर बैठ जा, अच्छे पैसे कमाएगा।” राहुल बिना सोचे-समझे तैयार हो गया और पढ़ाई छोड़कर सारा दिन मेले में जलेबी बाँटने लगा। उसे लगा कि पाँच दिन में पैसे कमा लेगा, फिर आराम से पढ़ लेगा।
परीक्षा के दिन जब प्रश्नपत्र आया, तो राहुल के सामने सवाल पहाड़ जैसे लगे। उसने कुछ पढ़ा ही नहीं था, इसलिए उसका पेपर बहुत खराब हुआ। मेले से मिले पैसे भी इतने कम थे कि उनसे उसकी नई किताबें तक नहीं खरीद पाया। रिज़ल्ट आया तो वह दो विषयों में फेल हो गया। कक्षा में सहपाठियों ने उसका मज़ाक उड़ाया और घर पर माता-पिता ने डाँट लगाई। इस तरह “काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय” की बात सही निकली।
राहुल बहुत पछताया और बोला, “काश! मैंने बिना बिचारे यह निर्णय न लिया होता।” उस दिन से उसने तय किया कि कोई भी बड़ा काम करने से पहले वह अच्छी तरह सोच-विचार करेगा और बड़ों की सलाह ज़रूर लेगा।
सीख: कोई भी निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए।
