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आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है − इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?

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Question

आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है −

इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?

Short/Brief Note
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Solution

इस तरह की पत्रकारिता नौजवान पीढ़ी को नकल करने की ही शिक्षा दे रही है। वे इनकी तरह दिखने व खाने सम्बन्धी आदतों को अपनाने लगे हैं। उन्हीं की तरह कपड़े पहनना आरम्भ कर देते हैं। जिसने फैशन के इस दौर को जन्म दिया वो अपने व्यक्तित्व पर दूसरे का पहनावा व आदतों को लादने लगते हैं। परिणामस्वरूप उनका अपना व्यक्तित्व उनकी चर्चित हस्तियों की छवि देना आरम्भ कर देता है। इसी तरह के वर्णनों ने समाज में सिगरेट व शराब का चलन आरम्भ किया है। यदि उनकी पसंद का कलाकार या हस्ती शराब सिगरेट पीते हुए दिख जाते हैं तो वह भी उसी तरह सिगरेट व शराब का सेवन करते हैं। वैसे ही बालों की कटिंग करवाते हुए दिख जाएँगे। ये युवा पीढ़ी की सोच पर असर डालती है जो सही नहीं हैं।

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जॉर्ज पंचम की नाक
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सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है।


आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है −

इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?


जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?


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जॉर्ज पंचम की नाक की सुरक्षा के लिए क्या-क्या इंतजाम किए गए थे?


रानी के भारत आगमन से पहले ही सरकारी तंत्र के हाथ-पैर क्यों फूले जा रहे थे?


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‘जॉर्ज पंचम की नाक’ पाठ के आधार पर बताइए कि रानी एलिजाबेथ द्वितीय के भारत आगमन से पूर्व अधिकारियों को क्या चिंता हुई। देश की नाक बचाने के लिए कौन-सी जी-तोड़ कोशिशें की गईं?


‘जॉर्ज पंचम की नाक’ पाठ के आधार पर बताइए कि रानी के आगमन पर राजधानी में क्या-क्या तैयारियाँ हो रही थी? इस तैयारी और बदलाव के पीछे भारतीय प्रशासन की कौन-सी मानसिकता थी? इसे देख आपको क्या अनुभव होता है?


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