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Question
1991 के आर्थिक सुधारों के दौरान भारत सरकार द्वारा वित्तीय क्षेत्र में सुधार लागू करने के किन्हीं दो उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।
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Solution
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रिज़र्व बैंक (RBI) की भूमिका में परिवर्तन: सुधारों का मुख्य उद्देश्य RBI की भूमिका को नियंत्रक (regulator) से सुगमकर्ता (facilitator) में बदलना था। इसका अर्थ यह हुआ कि RBI हर बैंकिंग क्रिया‑गत पक्ष (जैसे ब्याज दरों का हर पहलू) पर कठोर नियंत्रण रखने के बजाय बैंकों को अधिक स्वायत्तता देने लगा, ताकि वे अपनी वित्तीय नीतियाँ स्वायत्त रूप से तय कर सकें। इस परिवर्तन से बाजार‑आधारित वातावरण को प्रोत्साहन मिला और बैंकिंग निर्णयों में लचीलापन आया।
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प्रतिस्पर्धा और निजी/विदेशी भागीदारी को बढ़ावा: सुधारों का एक उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को निजी एवं विदेशी प्रतिभागियों के लिये खोलना भी था। निजी‑क्षेत्र बैंकों की स्थापना की अनुमति देकर तथा विदेशी संस्थागत निवेश (FII) पर सीमाएँ बढ़ाकर सरकार ने बेहतर प्रौद्योगिकी, ग्राहक‑सेवा में सुधार और प्रतिस्पर्धा के माध्यम से समग्र दक्षता बढ़ाने का लक्ष्य रखा।
