मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए।

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प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

        स्वाधीन भारत में अभी तक अंग्रेजी हवाओं में कुछ लोग यह कहते मिलेंगे – जब तक विज्ञान और तकनीकी ग्रंथ हिंदी में न हो तब तक कैसे हिंदी में शिक्षा दी जाए। जब कि स्वामी श्रद्धानंद स्वाधीनता से भी चालीस साल पहले गुरुकुल काँगड़ी में हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे। ग्रंथ भी हिंदी में थे और पढ़ाने वाले भी हिंदी के थे। जहाँ चाह होती है वहीं राह निकलती है। एक लंबे अरसे तक अंग्रेज गुरुकुल काँगड़ी को भी राष्ट्रीय आंदोलन का अभिन्न अंग मानते रहे। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि गुरुकुल के स्नातकों में स्वाधीनता की अजीब तड़प थी। स्वामी श्रद्धानंद जैसा राष्ट्रीय नेता जिस गुरुकुल का संस्थापक हो और हिंदी शिक्षा का माध्यम हो; वहीं राष्ट्रीयता नहीं पनपेगी तो कहाँ पनपेगी। स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता भी गुरुकुल आते रहते थे।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

  1. कौन हिंदी के माध्यम से विज्ञान जैसे गहन विषयों की शिक्षा दे रहे थे?
  2. कहाँ राह निकलती है?
  3. लंबे अरसे तक अंग्रेज किसे राष्ट्रीय आंदोलन का अभिनन अंग मानते रहे?
  4. स्वामी जी से मिलने देश के प्रमुख राष्ट्रीय नेता कहाँ आते रहते थे?
shaalaa.com
अपठित गद्यांश
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2019-2020 (March) Official

संबंधित प्रश्‍न

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए 

हर किसी को आत्‍मरक्षा करनी होगी, हर किसी को अपना कर्तव्य करना होगा । मैं किसी की सहायता की प्रत्‍याशा नहीं करता। मैं किसी का भी प्रत्‍याह नहीं करता । इस दुनिया से मदद की प्रार्थना करने का मुझे कोई अधकिार नहीं है । अतीत में जनि लोगों ने मेरी मदद की है या भविष्य में भी जो लोग मेरी मदद करेंगे, मेरे प्रति उन सबकी करुणा मौजूद है, इसका दावा कभी नहीं किया जा सकता। इसीलिए मैं सभी लोगों के प्रति चरि कृतज्ञ हूँ । तुम्‍हारी परिस्तिति इतनी बुरी देखकर मैं बेहद चिंतति हूँ । लेकनि यह जान लो कि-‘तुमसे भी ज्‍यादा दुखी लोग इस संसार में हैं । मैं तुमसे भी ज्‍यादा बुरी परसि्‍थतिि में हूँ । इंग्‍लैंड में सब कुछ के लिए मुझे अपनी ही जेब से खर्च करना पड़ता है । आमदनी कुछ भी नहीं है । लंदन में एक कमरे का किराया हर सप्ताह के लिए तीन पाउंड होता है । ऊपर से अन्य कई खर्च हैं । अपनी तकलीफों के लिए मैं किससे शकिायत करूँ ? यह मेरा अपना कर्मफल है, मुझे ही भुगतना होगा ।’

(१) कृति पूर्ण कीजिए :

१.

२.

(२) उत्‍तर लिखिए :

१. परिच्छेद में उल्लिखित देश - ______
२. हर किसी को करना होगा - ______
३. लेखक की तकलीफें - ______
4. हर किसी को करनी होगी - ______

(३) निर्देशानुसार हल कीजिए :

(अ) निम्‍नलिखित अर्थ से मेल खाने वाला शब्‍द उपर्युक्‍त परिच्छेद से ढूँढ़कर लिखिए :

१. स्‍वयं की रक्षा करना - ______
२. दूसरों के उपकारों को मानने वाला - ______

(ब) लिंग पहचानकर लिखिए :

१. जेब - ______
२. दावा - ______
३. साहित्‍य - ______
4. सेवा - ______

(४) ‘कृतज्ञता’ के संबंध में अपने विचार लिखिए ।


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

           रविशंकर जी भारत के जाने-माने सितार वादक व शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। उन्होंने बोटल्स व विशेष तौर पर जॉर्ज हैरीसन के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय संगीत को, विदेशों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

           उनका जन्म ०७ अप्रैल, १९२० को वाराणसी में हुआ। उनके बड़े भाई उदयशंकर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक थे। प्रारंभ में रविशंकर जी उनके साथ विदेश यात्राओं पर जाते रहे व कई नृत्य-नाटिकाओं में अभिनय भी किया।

           १९३८ में उन्होंने नृत्य कों छोड़कर संगीत को अपना लिया व मेहर घराने के उस्ताद अलाउद्‌दीन खाँ से सितार वादन का प्रशिक्षण लेने लगे। १९४४ में अपनो प्रशिक्षण समाप्त करने के बाद, उन्होंने आई. पी. टी. ए. में दाखिला लिया व बैले के लिए सुमधुर धुनें बनाने लगे। वे ऑल इंडिया रेडियो में वाद्‌यवृंद प्रमुख भी रहे।

           १९५४ में उन्होंने सर्वप्रथम सोवियत यूनियन में पहला विदेशी प्रदर्शन दिया। फिर एडिनबर्ग फेस्टिवल के अतिरिक्त रॉयल फे. स्टिवल हॉल में भी प्रदर्शन किया। १९६० के दर्शक में ब्रीटल्स के साथ काम करके उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की धूम विदेशों तक पहुँचा दी।

           वे १९८६ से १९९२ तक राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे। १९९९ में उन्हें भारतरत्न से सम्मानित, किया गया। उन्हें पद्मविभूषण, मैग्सेसे, ग्रेमी, क्रिस्टल तथा फूकुओका आदि अनेक पुरस्कार भी प्राप्त हुए।

           उनकी पुत्री अनुष्का का जन्म १९८२ में, लंदन में हुआ। अनुष्का का पालन-पोषण दिल्‍ली व न्यूयार्क में हुआ। अनुष्काने पिता से सितार वादन सीखा व अल्प आयु में ही अच्छा कैरियर बना लिया। वे बहुप्रतिभाशाली कलाकर हैं। उन्होंने पिता को समर्पित करते हुए एक पुस्तक लिखी- ‘बापी, द लव ऑफ माई लाईफ।’ इसके अतिरिक्त उन्होंने एक फिल्म में भरतनाट्यम नर्तकी का रोल भी अदा किया।

           पंडित रविशंकर जी ने अनेक नए रागों की रचना की। सन्‌ २००० में उन्हें तीसरी बार ग्रेमी-पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंडित जी ने सही मायने में पूर्व तथा पश्चिमी संगीत के मध्य एक से हेतु कायम किया है। दिसंबर २०१२ में उनका स्वर्गवास हुआ।

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

रविशंकर जी को प्राप्त पुरस्कार

(१)  
  ↓
(२)   
  ↓
(३)  
  ↓
(४)  

(२) निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए: (२)

  1. नर्तक - ______
  2. माता - ______
  3. पंडिताईन - ______
  4. पुत्र - ______

(३) ‘संगीत का जीवन में महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-

कुछ नहीं पूछ पाए हालदार साहब। कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, फिर पान के पैसे चुकाकर जीप में आ बैठे और रवाना हो गए। बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। दुखी हो गए। पंद्रह दिन बाद फिर उसी कस्बे से गुज़रे। कस्बे में घुसने से पहले ही खयाल आया कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी, लेकिन सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा। ...क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया। ...और कैप्टन मर गया। सोचा, आज वहाँ रुकेंगे नहीं, पान भी नहीं खाएँगे, मूर्ति की तरफ़ देखेंगे भी नहीं, सीधे निकल जाएँगे। ड्राइवर से कह दिया, चौराहे पर रुकना नहीं, आज बहुत काम है, पान आगे कहीं खा लेंगे। लेकिन आदत से मजबूर आँखें चौराहा आते ही मूर्ति की तरफ़ उठ गईं। कुछ ऐसा देखा कि चीखे, रोको! जीप स्पीड में थी, ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे। रास्ता चलते लोग देखने लगे। जीप रुकते-न-रुकते हालदार साहब जीप से कूदकर तेज़-तेज़ कदमों से मूर्ति की तरफ़ लपके और उसके ठीक सामने जाकर अटेंशन में खड़े हो गए। मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। हालदार साहब भावुक हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं।
  1. हालदार साहब क्या सोचकर दुखी हो गए?
    (क) नेता जी की मूर्ति की आँखों पर चश्मा न देखकर
    (ख) देशभक्तों का मज़ाक उड़ाने वाली बिकाऊ कौम को देखकर
    (ग) घर-गृहस्थी, जवानी-ज़िंदगी आदि की बीती हुई बातें सोचकर
    (घ) देश में अलग-अलग कौमों की विचारधारा में बहुत अंतर देखकर

  2. 'सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति की आँखों पर चश्मा नहीं होगा...!'  हालदार साहब ऐसा क्यों सोच रहे थे?
    (क) कैप्टन के सारे चश्मे बिक जाने के कारण
    (ख) कैप्टन के गंभीर रूप से बीमार हो जाने के कारण
    (ग) मूर्तिकार मास्टर की भूल और कैप्टन की मृत्यु के कारण
    (घ) नटखट बच्चों द्वारा चश्मा बार-बार उतार दिए जाने के कारण

  3. हालदार साहब की आदत से मजबूर आँखों ने क्या किया?
    (क) चौराहे पर आते ही पान की दुकान खोजने लगीं
    (ख) उन्होंने कैप्टन का स्मरण किया और वे नम हो गईं
    (ग) चौराहे पर आते ही स्वभावतः मूर्ति की ओर उठ गईं
    (घ) बाँस पर चश्मे लगाकर उन्हें बेचते हुए कैप्टन को खोजने लगीं

  4. हालदार साहब क्यों चीख पड़े?
    (क) पानवाले का बदला हुआ व्यवहार देखकर
    (ख) नेता जी की मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगा देखकर
    (ग) नेता जी की मूर्ति के पास बहुत सारे बच्चों को एकत्र देखकर
    (घ) ड्राइवर के द्वारा उनके आदेश का पालन न किए जाने के कारण

  5. सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा किस बात का प्रतीक था?
    (क) राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षण देने का
    (ख) हस्तकला के प्रति बढ़ रहे अनुराग का
    (ग) देशभक्तों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का
    (घ) सरकंडे जैसी वनस्पति को संरक्षित करने का

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आने वाली महिला की तबीयत थोड़ी खराब थी और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनका इलाज होना था। चूँकि वह मेरी बुआ जी को जानते थे और बुआ जी के छोटे भाई का परिवार पटना में था इसलिए ये तो सोचने की बात नहीं थी कि वह कहाँ रहेंगे। वह बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे घर पहुँच गए थे। उनकी ट्रेन तो शाम को थी, लेकिन ट्रेन के टाइम से न चलने का बुरा कौन मानता है।

ट्रेन पाँच घंटे लेट पहुँची थी और हमारे वह मेहमान बिना खाए-पिए आधी रात में हमारे घर पहुँच गए थे।

फटाफट खाना बना। सोने का जुगाड़ हुआ।
और सुबह उन्हें अस्पताल पहुँचाने का भी।

वे कोई सप्ताह भर हमारे घर रहे। हम खूब घूल-मिल गए। हम रोज ठहाके लगाते, साथ खाते और पूरी मस्ती करते। ऐसा लग रहा था, मानो हम सदियों से एक-दूसरे को जानते हों। बुआ जी ने तिल की मिठाई भेजी थी। दिल्‍ली में उसे गजक कहते हैं, हमारे यहाँ सब तिलकुंट कहते थे। हम सबने तिल और गुड़ की उस मिठाई को खूब मजे लेकर खाया। हमारी बुआ जी सारे संसार का ख्याल रखती थीं और भाई-भतीजों में तो उनकी आत्मा ही बसती थी।

उन्होंने अपने परिचित भेज दिए, हमने उन्हें रिश्तेदार बना लिया।
आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि हम दुबारा कभी उन रिश्तेदारों से नहीं मिल पाए जो उस रात हमारे घर आए थे। लेकिन हम सभी भाई-बहनों के जेहन में उस रिश्ते की याद आज भी ताजा है। हम आज भी उनके आने और अपनी रजाई छिन जाने को याद कर खुश होते हैं।

(1) कृति पूर्ण कीजिए:   (2)

(i)

(ii)

(2) उत्तर लिखिए:   (2)

  1. बुआ जी की आत्मा बसती थी - .....................
  2. आने वाली महिला की तबीयत थी - .....................
  3. बुआ जी खयाल रखती थीं - .....................
  4. अतिथि लेखक के घर रहे - .....................

(3) ‘संयुक्त परिवार’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   (3)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आकाश में बिजली की कौंधें बीच-बीच में लपक उठती थीं। बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर रामबोला को लगा कि मानों चैनसिंह ठाकुर अपने हलवाहा को डॉट रहे हैं। रामबोला अनायास ही ताव में आ गया। उठा और फिर नये श्रम की साधना में लग गया। दूसरे छप्पर के ढीले पड़ गए अंजर-पंजर को कसने के 'लिए पास ही खलार में उगी लंबी घास-पतवार उखाड़ लाया। रामबोला ने भिखारी बस्ती के और लोगों को जैसे घास बैँटकर रस्सी बनाते देखा था; वैसे ही बैंटने लगा। जैसे-तैसे रस्सियाँ बैंटी, जस-तस टट्टर बाँधा। अब जो उसकी आधी से अधिक उधड़ी हुई छावन पर ध्यान गया तो नन्हे मन के उत्साह को फिर' काठ मार गया। घास-फूस, ज्यौनारों में जूठन के साथ-साथ बाहर फेंकी गई पत्तलों और चिथड़े-गुदड़ों से 'बनाई गई वह छोटी -सी छपरिया फिर से छानें के लिए वह सामान कहाँ से जुटाए? हवा दूवारा उड़ाए हुए.माल वह इस बरसात में कहाँ-कहाँ ढूँढ़ैगा। दैव आज प्रलय की बरखा करके ही दम लेंगे। हवा के मारे औरों के छप्पर भी पेंगें ले रहे हैं।

(1) लिखिए:  (2)

गद्यांश में उल्लिखित प्राकृतिक घटक

↓
____________
____________
____________
____________

(2) लिखिए:

(i) एक शब्द में उत्तर लिखिए :   (1)

  1. हलवाहा को डाँटने वाला - ____________
  2. अनायास ही ताव में आने वाला - ____________

(ii) विशेषता लिखिए :  (1)

  1. बिजली - ______
  2. बादल - ______

(3) 'विनाश और निर्माण प्रकृति के नियम हैं' इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (3)


निम्नलिखित अपठित गदूयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

अब अकेला बैल किस काम का? उसका जोड़ बहुत ढूँढ़ा गया, पर न मिला। निदान यह सलाह ठहरी कि इसे बेच डालना चाहिये। गाँव में एक समझू साहु थे, वह इकका गाड़ी हाँकते थे। गाँव के गुड़, घी लाद कर मंडी ले जाते, मंडी से तेल, नमक भर लाते और गाँव में बेचते। इस बैल पर उनका मन लहराया। उन्होंने सोचा, यह बैल हाथ लगे तो दिनभर में बेखटके तीन खेप हों। आजकल तो एक ही खेप में लाले पड़े रहते हैं। बैल देखा, गाड़ी में दौड़ाया, बाल-भौंरी की पहचान करायी, मोल-तोल किया और उसे लाकर दूवार पर बाँध ही दिया। एक महीने में दाम चुकाने का वादा ठहरा। चौधरी को भी गरज थी ही, घाटे की परवाह न की।

समझू साहु ने नया बेल पाया, तो लगे उसे रगेदने। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार खेपें करने लगे। न चारे की फिक्र थी, न पानी की, बस खेपों से काम था।

(1) कृति पूर्ण कीजिए -  (2)

(2) लिखिए -  (2)

बैल को देखकर समझू ने यह किया :

  1. ____________
  2. ____________
  3. ____________
  4. ____________

(3) 'हमारे अन्नदाता किसान' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (2)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- 

परिश्रम यानी मेहनत अपना जवाब आप ही है। उसका अन्य कोई जवाब न है, न हो सकता है अर्थात जिस काम के लिए परिश्रम करना आवश्यक हो, हम चाहें कि वह अन्य किसी उपाय से पूरा हो जाए, ऐसा हो पाना कतई संभव नहीं। वह तो लगातार और मन लगाकर परिश्रम करने से ही होगा। इसी कारण कहा जाता है कि 'उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी' अर्थात उद्योग या परिश्रम करने वाले पुरुष सिंहों का ही लक्ष्मी वरण करती है। सभी प्रकार की धन-संपत्तियाँ और सफलताएँ लगातार परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, यह परीक्षण की कसौटी पर कसा गया सत्य है। निरंतर प्रगति और विकास की मंज़िलें तय करते हुए हमारा संसार आज जिस स्तर और स्थिति तक पहुँच पाया है, वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नहीं हुआ। कई प्रकार के विचार बनाने, अनुसंधान करने, उनके अनुसार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभावों और कठिनाइयों को सहते हुए निरंतर परिश्रम करते रहने से ही संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शिखर पर बैठकर दूसरों पर शासन कर रहे हैं, आदेश दे रहे हैं, ऐसी शक्ति और सत्ता प्राप्त करने के लिए पता नहीं किन-किन रास्तों से चलकर, किस-किस तरह के कष्ट और परिश्रमपूर्ण जीवन जीने के बाद उन्हें इस स्थिति में पहुँच पाने में सफलता मिल पाई है। हाथ-पैर हिलाने पर ही कुछ पाया जा सकता है, उदास या निराश होकर बैठ जाने से नहीं। निरंतर परिश्रम व्यक्ति को चुस्त-दुरुस्त रखकर सजग तो बनाता ही है, निराशाओं से दूर रख आशा-उत्साह भरा जीवन जीना भी सिखाया करता है।
  1. परीक्षण की कसौटी पर कसे जाने से तात्पर्य है-
    (क) सत्य सिद्ध होना
    (ख) कथन का प्रामाणिक होना
    (ग) आकलन प्रक्रिया तीव्र होना
    (घ) योग्यता का मूल्यांकन होना

  2. 'हाथ-पैर हिलाने से कुछ पाया जा सकता है।' पंक्ति के माध्यम से लेखक ______ की प्रेरणा दे रहे हैं।
    (क) तैराकी
    (ख) परिश्रम
    (ग) परीक्षण
    (घ) हस्तशिल्प

  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
    1. परिश्रम व्यक्ति को सकारात्मक बनाता है।
    2. आज संसार पतन की ओर बढ़ रहा है।
    3. पुरुषार्थ के बल पर ही व्यक्ति धनार्जन करता है।
      उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा /कौन-से कथन सही है / हैं?

      (क) केवल (i)
      (ख) केवल (ii)
      (ग) (i) और (iii)
      (घ) (ii) और (iii)
  4. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए 'अनुसंधान' शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है-
    (क) परीक्षण
    (ख) योजनाएँ
    (ग) अन्वेषण
    (घ) सिंहमुपैति
  5. निम्नलिखित में से किस कथन को गद्यांश की सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
    (क) अल्पज्ञान खतरनाक होता है।
    (ख) गया समय वापस नहीं आता है।
    (ग) मेहनत से कल्पना साकार होती है।
    (घ) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

संस्कृति और सभ्यता ये दो शब्द हैं और इनके अर्थ भी अलग-अलग हैं। सभ्यता मनुष्य का वह गुण है, जिससे वह अपनी बाहरी तरक्की करता है। संस्कृति वह गुण है, जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है और करुणा, प्रेम एवं परोपकार सीखता है। आज रेलगाड़ी, मोटर और हवाई जहाज़, लंबी-चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक ये सभी सभ्यता की पहचान हैं और जिस देश में इनकी जितनी ही अधिकता है, उस देश को हम उतना ही सभ्य मानते हैं। मगर संस्कृति इन सबसे कहीं बारीक चीज़ है। वह मोटर नहीं, मोटर बनाने की कला है। मकान नहीं, मकान बनाने की रुचि है। संस्कृति धन नहीं, गुण है। संस्कृति ठाठ-बाट नहीं, विनय और विनम्रता है। एक कहावत है कि सभ्यता वह चीज़ है जो हमारे पास है, लेकिन संस्कृति वह गुण है जो हममें छिपा हुआ है। हमारे पास घर होता है, कपड़े होते हैं, मगर ये सारी चीज़ें हमारी सभ्यता के सबूत हैं, जबकि संस्कृति इतने मोटे तौर पर दिखलाई नहीं देती, वह बहुत ही सूक्ष्म और महीन चीज़ है और वह हमारी हर पसंद, हर आदत में छिपी रहती है। मकान बनाना सभ्यता का काम है। लेकिन हम मकान का कौन-सा नक्शा पसंद करते हैं यह हमारी संस्कृति बतलाती है। आदमी के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और मत्सर ये छह विकार प्रकृति के दिए हुए हैं। परंतु अगर ये विकार बेरोक-टोक छोड़ दिए जाएँ तो आदमी इतना गिर जाए कि उसमें और जानवर में कोई भेद नहीं रह जाएगा। इसलिए आदमी इन विकारों पर रोक लगाता है। इन दुर्गणों पर जो आदमी जितना ज्यादा काबू कर पाता है, उसकी संस्कृति भी उतनी ही ऊँची समझी जाती है। संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान-प्रदान से बढ़ती है। जब दो देशों या जातियों के लोग आपस में मिलते हैं, तब उन दोनों की संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। इसलिए संस्कृति की दृष्टि से वह जाति या वह देश बहुत ही धनी समझा जाता है, जिसने ज़्यादा-से-ज़्यादा देशों या जातियों की संस्कृतियों से लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास किया हो।

(1) गद्यांश में ‘सभ्यता को बाहरी तरक्की’ बताया गया है क्योंकि यह - (1)

(क) इच्छापूर्ति में सक्षम है।
(ख) भौतिक साधनों की द्योतक है।
(ग) संस्कृति से भिन्न पहचान लिए है।
(घ) करुणा, प्रेम एवं परोपकार सिखाती है।

(2) सभ्यता और संस्कृति का मूलभूत अंतर क्रमशः है - (1)

(क) रेलगाड़ी, विनय
(ख) प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष
(ग) बाहरी तरक्की, भीतरी द्वंद्व
(घ) रिवाज़, सीख

(3) संस्कृति को ‘महीन चीज़’ कहने से लेखक सिद्ध करना चाहते हैं कि संस्कृति है - (1)

(क) अत्यंत तुच्छ
(ख) अति महत्वहीन
(ग) अत्यधिक उपयोगी
(घ) अति सर्वश्रेष्ठ

(4) निम्नलिखित वाक्यों में से सभ्यता के संदर्भ मैं कौन-सा वाक्य सही है? (1)

(क) सभ्यता मनुष्य के स्वाधीन चिंतन की गाथा है।
(ख) सभ्यता मानव के विकास का विधायक गुण है।
(ग) सभ्यता मानव को कलाकार बना देती है।
(घ) सभ्यता संस्कृति से अधिक महत्वपूर्ण है।

(5) संस्कृति की प्रवृत्ति है - (1)

(क) आदाय-प्रदाय
(ख) आदाय-प्राप्ति
(ग) क्रय-विक्रय
(घ) आबाद-बर्बाद

(6) ‘मकान के लिए नक्शा पसंद करना हमारी संस्कृति का परिचायक है।’ ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि - (1)

(क) घर हमारी सभ्यता की पहचान है।
(ख) अन्य लोगों से जोड़ने का माध्यम है।
(ग) नक्शे के बिना मकान बनाना कठिन है।
(घ) हमारी सोच-समझ को उजागर करता है।

(7) अन्य संस्कृतियों का लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास करना दर्शाता है - (1)

(क) समरसता
(ख) संपूर्णता
(ग) सफलता
(घ) संपन्नता

(8) मनुष्य की मनुष्यता इसी बात में निहित है कि वह - (1)

(क) सभ्यता और संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता रहे।
(ख) संस्कृति की समृद्धि के लिए कटिबद्धता बनाए रहे।
(ग) सभ्यता की ऊँचाई की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहे।
(घ) मानसिक त्रुटियों पर नियंत्रण पाने के लिए चेष्टावान रहे।

(9) आदमी और जानवर का भेद समाप्त होना दर्शाता है - (1)

(क) सामाजिक असमानता
(ख) चारित्रिक पतन
(ग) सांप्रदायिक भेदभाव
(घ) अणुमात्रिक गिरावट

(10) सुसंस्कृत व्यक्ति से तात्पर्य है - (1)

(क) विकारग्रस्त व्यक्ति
(ख) विकासशील व्यक्ति
(ग) विचारशील व्यक्ति
(घ) विकारमुक्त व्यक्ति


निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

जहाँ कोयल की मीठी वाणी सबका मन मोह लेती है, वहीं कौए को कर्कश आवाज किसी को अच्छी नहीं लगती । मधुर वचन न केवल सुनने वाले को, बल्कि बोलने वाले को भी आत्मिक शांति प्रदान करतें हैं। मनुष्य अपनी सद्भावनाओं का अधिकांश प्रदर्शन वचनों द्वारा ही करता है। मधुर वचन तप्त और दुःखी व्यक्ति का सही और सच्चा उपचार हैं। सहानुभूति के कुछ शब्द उसे इतना सुख देते हैं जितना संसार का कोई धनकोष नहीं दे पाता। मधुरभाषी शीघ्र ही सबका मित्र बन जाता है। लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। यहाँ तक कि पराए भी अपने बन जाते हैं। इससे समाज में पारस्परिक सौहार्द की भावना पैदा होती है, लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा और श्रद्धा का आधार भी मधुर वाणी ही है। मधुर वचन किसी के मन को ठेस नहीं पहुँचाते, बल्कि दूसरे के क्रोध को शांत करने में सहायक होते हैं। मधुर वाणी में ऐसा आकर्षण है जो बिना रस्सी के सबको बाँध लेती है। अतः याद रखना चाहिए-

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए।
औरन को सीतल करे, आपहूँ सीतल होए॥

(1) उत्तर लिखिए-    (2)

गद्यांश के आधार पर मधुर वचन की विशेषताएँ लिखिए-

  1. ____________
  2. ____________

(2) “शब्द शस्त्र के समान होते हैं उनका सावधानी से उपयोग करना चाहिए" वचन पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

             हमेशा यह कहा जाता है कि जीवन में जितनी भी तकलीफ हो, पीड़ा हो, दुख हो, कष्ट हो, हमें बहुत धैर्यपूर्वक इन सभी का प्रतिकार करना चाहिए। दुख के समय या विपत्ति के समय हमें बहुत शांत रहकर इनको सहन करना चाहिए, क्योंकि संसार में यह धारणा बहुत साफ दिखती है कि व्यक्ति अपने मन की व्यथा को खुद संभालकर रखे, नहीं तो वह उपहास का पात्र भी बन सकता है। यदि हम अपने मन की बातों या दुख होने पर इसे समाज के साथ बाँटते हैं, तो कुछ लोग इस पर ध्यान नहीं देते, अपितु वह इन्हें एक सामान्य सी बात कहकर मजाक भी बना डालते हैं। अत: कहा भी गया है-

रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय।
सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहैं कोय।।

(1) उत्तर लिखिए- (2)

समाज में लोगों की विशेषताएँ-

  1. ______
  2. ______

(2) मन की प्रवृत्ति पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

      मधुरता सत्य का अनुपान है और मितता उसका पथ्य है। जिसे हम सम्यक वाणी कहते हैं; वह सत्य, मित और मधुर होती है और वही परिणामकारक भी होती है। समाज का हित किस बात में है, समझना कभी कठिन हो सकता है। परंतु सम्यक वाणी से ही  वह सधेगा, यह किसी भी आदमी के लिए समझना कठिन नहीं होना चाहिए।

      परंतु यही आज भारी हो रहा है। समाजहित के नाम पर कार्यकर्ताओं की वाणी दूषित हो गई हैं, अर्थात मन ही दूषित हो गया है। फिर कृति कैसे भूषित हो सकती है?

      आज लेखन व भाषण के साधन सुलभतम हो गए हैं। परंतु शायद इसी कारण सभ्य वाणी दुर्लभ हो गई है। सभ्य वाणी को खोकर सुलभ साधनों की प्राप्ति करना यानी कवि की भाषा में नेत्र बेचकर चित्र खरीदने जैसा है।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ‘वाणी : मनुष्य को प्राप्त वरदान’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनियाभर में बढ़ते पर्यावरण संकट को कम करने में जैविक खेती एक उपचारक भूमिका निभा सकती है। गौरतलब है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक खेती बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है। धीरे-धीरे दक्षिण, मध्य भारत और उत्तर भारत में भी यह किसानों में लोकप्रिय हो रही है। अब किसानों ने जैविक खेती को एक सशक्त विकल्प के रूप में अपना लिया है। गौरतलब है कि जैविक या प्राकृतिक खेती की तरफ भारतीय किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। धीरे-धीरे जैविक खेती का प्रचलन बढ़ रहा है। जैविक बीज, जैविक खाद, पानी, किसानी के यंत्रों आदि की आसानी से उपलब्धता जैविक खेती की लोकप्रियता को और अधिक बढ़ा सकती है।

प्राकृतिक खेती को लेकर अनुसंधान भी बहुत हो रहे हैं। किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इससे कृषि वैज्ञानिक भी प्राकृतिक खेती को लेकर अधिक उत्साहित हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जैविक या प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से पर्यावरण,खाद्यान्न, भूमि, इंसान की सेहत, पानी की शुद्धता को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों और समस्याओं की जानकारी न होने की वजह से किसान इनका प्रयोग काफी ज़्यादा करने लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिक्किम में प्राकृतिक खेती से पर्यावरण को जितनी मदद मिली है उससे साफ़ हो गया है कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।

  1. आज जैविक खेती की माँग क्यों बढ़ती जा रही है?
    1. सस्ती होने के कारण 
    2. अधिक उत्पादन के कारण
    3. स्वच्छ पर्यावरण के कारण 
    4. सरकारी मदद मिलने के कारण
  2. सही कथन का चयन कीजिए-
    1. उत्तर भारत में जैविक खेती के लिए प्रेरणा की ज़रूरत है।
    2. पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती के प्रति अधिक उत्साह है।
    3. लोगों में प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी का अभाव है।
    4. प्राकृतिक खेती के लिए विश्वविद्यालय से शिक्षित होना ज़रूरी है।
  3. जैविक खेती को किसानों की पहली पसंद बनाने के लिए क्या करना चाहिए?
    1. रासायनिक खेती निषिद्ध की जानी चाहिए।
    2. बाजार में केवल जैविक उत्पादों बिक्री होनी चाहिए।
    3. युवकों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना चाहिए।
    4. जैविक बीज, खाद, किसानी के यंत्र आदि सुविधाएँ उपलब्ध करवानी चाहिए।
  4. वर्तमान समय में खेती के लिए; अनुसंधानों में बढ़ोतरी किसके बारे में हुई है?
    1. जैविक खेती 
    2. रासायनिक खाद
    3. नई-नई दवाइयाँ 
    4. नए बीज
  5. किसान कीटनाशकों और रासायनिक खादों का अधिक प्रयोग क्यों करने लगे हैं?
    1. सहज उपलब्धता के कारण
    2. दुष्प्रभावों की जानकारी न होने के कारण
    3. अधिक प्रचार-प्रसार के कारण
    4. सस्ती होने के कारण

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी/वस्तुपरक प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए।

    हमारे देश में हिंदी फ़िल्मों के गीत अपने आरंभ से ही आम दर्शक के सुख-दुख के साथी रहे हैं। वर्तमान समय में हिंदी फ़िल्मों के गीतों ने आम जन के हृदय में लोकगीतों सी आत्मीय जगह बना ली है। जिस तरह से एक जमाने में लोकगीत जनमानस के सुख-दुख, आकांक्षा, उल्लास और उम्मीद को स्वर देते थे, आज फ़िल्मी गीत उसी भूमिका को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं देश की विविधता को एकता के सूत्र में बाँधने में हिंदी फ़िल्मों का योगदान सभी स्वीकार करते हैं। हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का जो काम राजभाषा विभाग तत्सम शब्दों की सहायता से कर रहा है वही कार्य फ़िल्मी गीत और डायलॉग लिखने वाले विविध क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। यह गाने जन-जन के गीत इसी कारण बन सके क्योंकि इनमें राजनीति के उतार-चढ़ाव की अनुगूंजों के साथ देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का देशज जीवन दर्शन भी आत्मसात किया जाता रहा है। भारत की जिस गंगा-जमुनी संस्कृति का महिमामंडन बहुधा होता है उसकी गूंज भी इन गीतों में मिलती है। आजादी की लड़ाई के दौरान लिखे प्रदीप के गीत हों या स्वाधीनता प्राप्ति साथ ही होनेवाले देश के विभाजन की विभीषिका, सभी को भी इन गीतों में बहुत संवेदनशील रूप से व्यक्त किया गया है।

   हिंदी फ़िल्मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका। प्रदीप, नीरज जैसे शानदार हिंदी कवियों, इंदीवर तथा शैलेंद्र जैसे श्रेष्ठ गीतकारों और साहिर, कैफी, मजरूह जैसे मशहूर शायरों को हिंदी सिनेमा में हमेशा एक ही बिरादरी का माना जाता रहा है। यह सिनेमा की इस दुनिया की ही खासियत है कि एक तरफ गीतकार साहिर ने 'कहाँ हैं कहाँ हैं/मुहाफिज खुदी के/जिन्हें नाज है हिंद पर/वो कहाँ हैं' लिखा तो दूसरी तरफ उन्होंने ही 'संसार से भागे फिरते हो/भगवान को तुम क्या पाओगे !/ये भोग भी एक तपस्या है/तुम प्यार के मारे क्या जानोगे/अपमान रचयिता का होगा/रचना को अगर ठुकरा ओगे!' जैसी पंक्तियाँ भी रची हैं। परवर्तियों में गुलजार ऐसे गीतकार हैं जिन्होंने उर्दू, हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी के साथ पुरबिया बोलियों में मन को मोह लेने वाले गीतों की रचना की है। बंदिनी के 'मोरा गोरा अंग लइले, मोहे श्याम रंग दइदे', 'कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नयना!', 'यारा सिली सिली रात का ढलना' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीतों को रचकर उन्होंने भारत की साझा संस्कृति को मूर्तिमान कर दिया है। वस्तुतः भारत में बनने वाली फिल्मों में आने वाले गीत उसे विश्व-सिनेमा में एक अलग पहचान देते हैं। ये गीत सही मायने में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं।

  1. हिंदी फिल्‍मी गीतों और लोकगीतों में क्या समानता है?
    A. ये लोगों के रीति-रिवाजों, उनकी लालसाओं उनकी सोच और कल्पनाओं को स्वर देते हैं।
    B. ये लोगों के जीवन के अनुभवों, आमोद प्रमोद, विचारों और दर्शन को स्वर देते हैं।
    C. ये लोगों के आनंद उनके शोक, उनके हर्ष और उनकी आशाओं को स्वर देते हैं।
    D. ये लोगों के जीवन के यथार्थ और कठोरताओं में ज़िंदा रहने की चाह को स्वर देते हैं।
  2. हिंदी भाषा की शब्द संपदा को समृद्ध करने का काम फिल्‍मी गीतों ने किस प्रकार किया?
    A. राजभाषा विभाग से प्रेरणा पाकर
    B. विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के मेल से
    C. क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को प्रोत्साहित करके
    D. विदेशी भाषाओं की फिल्मों को हतोत्साहित करके
  3. कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए:
    कथन (A): हिंदी फिल्मों के गाने जन जन के गीत बन गए हैं।
    कारण (R): इन गीतों में राजनीति की अनुगूंजों के साथ, देहाती कस्बायी और नए बने शहरों का जीवन दर्शन थी आत्मसात किया जाता रहा है।
    A. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
    B. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
    C. कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
    D. कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  4. 'हिंदी फिल्‍मी गीतों के इस संसार में हिंदी-उर्दू का 'झगड़ा' भी कभी पनप नहीं सका।' उपर्युक्त कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्कों पर विचार कीजिए।
    1. यहाँ सभी गीतकारों को एक ही बंधुत्व वर्ग का माना जाता है।
    2. ये गीतकार सभी भाषाओं में समान रूप से गीत लिखते हैं।
    3. इन गीतकारों में वैमनस्य व प्रतिस्पर्धा का भाव नहीं है।
    A. 1 सही है।
    B. 2 सही है।
    C. 3 सही है।
    D. 1 और 2 सही है।
  5. उपर्युक्त गद्यांश में हिंदी फिल्‍मी गीतों की किस विशेषता पर सर्वाधिक बल दिया गया है?
    A. ये गीत कलात्मक श्रेष्ठता व सर्वधर्म समभाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    B. ये गीत सांप्रदायिक सद्धाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    C. ये गीत पारस्परिक प्रेम व सद्भाव को अभिव्यक्त करते हैं।
    D. ये गीत हमारी तहज़ीब की खूबसूरती को अभिव्यक्त करते हैं।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -

कोलकाता भी दूसरे बड़े शहरों की तरह एक बड़ी नदी के किनारे बसा है। गंगा से निकली एक धारा ही है हुगली नदी। लेकिन दूसरे कई नगरों की तरह कोलकाता में नदी का बहाव एकतरफा नहीं है। हुगली ज्वारी नदी है और बंगाल की खाड़ी से उसका मुहाना 140 किलोमीटर की दूरी पर ही है। हर रोज़ ज्वार के समय समुद्र नदी के पानी को वापस कोलकाता तक ठेलता है। ज्वार और भाटे के बीच जल स्तर एक ही दिन में कई फुट ऊपर-नीचे हो जाता है।

शहर के पश्चिम में बहने वाली हुगली नदी में कोलकाता अपना मैला पानी बहाकर उसे भुला नहीं सकता। नीचे बह जाने की बजाए क्या पता ज्वार के पानी के साथ अपशिष्ट पदार्थ वापस शहर लौट आएँ? शहर के कुल मैले पानी का एक छोटा-सा हिस्सा ही हुगली में बहाया जाता है, वह भी चोरी-छिपे। इसका परिणाम यह है कि कोलकाता में हुगली अधिक दूषित नहीं है। लेकिन हर बड़े शहर को अपना मैला पानी फेंकने के लिए एक नदी चाहिए। तो फिर कोलकाता का मैला कहाँ जाता है?

हुगली से उल्टी दिशा में, शहर के पूरब में बहने वाली एक छोटी-सी नदी कुल्टीगंग में। पर नदी तक पहुँचने के पहले इस मैले पानी के बड़े हिस्से का उपचार होता है। कुल्टीगंग में गिरने वाला मैला पानी उतना दूषित नहीं होता है जितना वह शहर से निकलते समय होता है। यहाँ मैले पानी की सफाई का तरीका भी दूसरे शहरों से निराला है। कोई 30,000 एकड़ में फैले तालाब और खेत कोलकाता के कुल मैले पानी का दो-तिहाई हिस्सा साफ करते हैं। यही नहीं, इससे कई हज़ार लोगों को रोज़गार मिलता है मैले पानी से मछलियाँ, सब्जियाँ और धान उगाकर।

इसका एक कारण है यहाँ का अनूठा भूगोल, जो बना है गंगा के मुहाने पर होने वाले मिट्टी और पानी के प्राकृतिक खेल से। पता नहीं कब से गंगा की बड़ी धार यहाँ से बहकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होती थी। पर यह संगम केवल गंगा और बंगाल की खाड़ी भर का नहीं रहा है। छोटी-बड़ी कई नदियों की कई धाराएँ हिमालय की मिट्टी गाद या साद के रूप में लाकर यहाँ जमा करती रही हैं। कह सकते हैं कि यहाँ हिमालय और समुद्र मिलते हैं।

  1. कोलकाता में बहने वाली किन-किन नदियों का उल्लेख अनुच्छेद में हुआ है?
    1. गंगा, कुल्टीगंग, यमुना
    2. गंगा, हुगली, उल्टीगंगा
    3. गंगा, यमुना, हुगली
    4. हुगली, गंगा, कुल्टीगंग
  2. गद्यांश आधारित निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए -
    कथन 
    (क) हुगली नदी में जल-स्तर ज्वार और भाटे के अनुरूप ऊपर-नीचे होता रहता है।
    (ख) कुल्टीगंग कोलकाता के पूरब में बहती है।
    (ग) कोलकाता की अधिकतर नदियाँ उल्टी दिशा की ओर बहती हैं।
    विकल्प
    1. कथन (क) सही है।
    2. कथन (क) और (ख) सही हैं।
    3. कथन (ख) और (ग) सही हैं।
    4. कथन (ग) और (क) सही हैं।
  3. कुल्टीगंग में गिरने वाला कोलकाता का मैला पानी उतना दूषित क्यों नहीं होता?

    1. क्योंकि वह पहले हुगली नदी में जाता है।
    2. कोलकाता के लोग पानी मैला नहीं करते।
    3. नदी में गिरने से पूर्व खेतों और तालाबों से उपचारित होता है।
    4. क्योंकि कुल्टीगंग स्वयं ही गंदगी को उपचारित कर लेती है।
  4. निम्नलिखित कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए -
    कथन (A): कोलकाता के बंगाल में बंगाल की खाड़ी में हिमालय और समुद्र मिलते हैं।
    कारण (R): यहाँ गंगा और अन्य नदियाँ मिट्टी गाद या साद इकट्ठा करती हैं।

    1. कथन (A) गलत है पर कारण (R) सही है।
    2. कथन (A) सही है पर कारण (R) गलत है।
    3. कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
    4. कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
  5. कोलकाता हुगली नदी में अपना मैला पानी क्यों नहीं बहा सकता?

    1. शहर में हुगली को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है।
    2. हुगली एक छोटी नदी है, मैला पानी बहाने लायक नहीं है।
    3. हुगली में समुद्र पानी वापस भेजता है, अपशिष्ट लौट सकता है।
    4. हुगली पश्चिम में बहती है, अपशिष्ट उस ओर लाना कठिन है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

    आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है और भाषा संस्कार से बनती है। जिसके जैसे संस्कार होंगे, वैसी उसकी भाषा होगी। जब कोई आदमी भाषा बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं। यही कारण है कि भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत गुरुतर और चुनौतीपूर्ण है। परंपरागत रूप में शिक्षक की भूमिका इन तीन कौशलों - बोलना, पढ़ना और लिखना तक सीमित कर दी गई है। केवल यांत्रिक कौशल किसी जीती-जागती भाषा का उदाहरण नहीं हो सकते हैं। सोचना और महसूस करना दो ऐसे कारक हैं, जिनमें भाषा सही आकार पाती है। इनके बिना भाषा, भाषा नहीं है, इनके बिना भाषा संस्कार नहीं बन सकती, इनके बिना भाषा युगों-युगों का लंबा सफ़र तय नहीं कर सकती, इनके बिना कोई भाषा किसी देश या समाज की धड़कन नहीं बन सकती। केवल संप्रेषण ही भाषा नहीं है। दर्द और मुस्कान के बिना कोई भाषा जीवंत नहीं हो सकती।

    भाषा हमारे समाज के निर्माण, विकास, अस्मिता, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं है। भाषा में ही हमारे भाव राज्य, संस्कार, प्रांतीयता झलकती है। इस झलक का संबंध व्यक्ति की मानवीय संवेदना और मानसिकता से भी होता है। जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य और मानसिकता जिस स्तर की होगी, उसकी भाषा के शब्द और मुख्यार्थ भी उसी स्तर के होंगे। साहित्यकार ऐसी भाषा को आधार बनाते हैं, जो उनके पाठकों एवं श्रोताओं की संवेदना के साथ एकाकार करने में समर्थ हों।

  1. आदमी की पहचान उसकी भाषा से होती है, क्योंकि -
    (A) मनुष्य की पूर्णता भाषा द्वारा ही संभव है।
    (B) व्यक्ति के मनोभाव भाषा से ही व्यक्त होते हैं।
    (C) भाषा का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता।
    (D) दर्द और मुस्कान के बिना भाषा जीवित नहीं हो सकती।
  2. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A): जब कोई आदमी बोलता है, तो साथ में उसके संस्कार भी बोलते हैं।
    कारण (R): भाषा शिक्षक का दायित्व बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे कौशलों का विकास करना होता है।
    (A) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (B) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
    (C) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (D) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
  3. गद्यांश में साहित्यकार द्वारा किए गए कार्य का उल्लेख इनमें से कौन-से विकल्प से ज्ञात होता है -
    (A) साहित्य समाज का दर्पण है।
    (B) साहित्यकार साहित्य सृजन में व्यस्त रहता है।
    (C) साहित्यकार सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान बनाता है।
    (D) साहित्यकार जन सामान्य की अस्मिता का परिचायक होता है।
  4. 'दर्द और मुसकान के बिना भाषा जीवंत नहीं हो सकती।' लेखक द्वारा ऐसा कथन दर्शाता है -
    (A) यथार्थ की समझ
    (B) सामाजिक समरसता
    (C) साहित्य-प्रेम
    (D) भाषा कौशल
  5. भाषा तब सही आकार पाती है, जब -
    (A) मनुष्य निरंतर उसका अभ्यास करता रहता है।
    (B) भाषा को सरकारी समर्थन भी प्राप्त होता है।
    (C) भाषा सामाजिक संस्थाओं से प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
    (D) भाषायी कौशलों के साथ मनुष्य सोचता और महसूस भी करता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले बिकल्प चुनकर लिखिए:

     अनुभवी व्यक्तियों का कहना है, लक्ष्य चुनना ही काफ़ी नहीं होता, बल्कि उसे जितनी जल्दी चुना जाए, उतना ही बेहतर है। कई बड़े का बिल लोग लक्ष्य चुनने में इतनी देर कर देते हैं कि उसे हासिल करने के लिए जीवन में समय ही नहीं बचता। इसीलिए स्कूली स्तर पर ही भाषा, गणित, विज्ञान समेत सभी विषयों के साथ-साथ खेल-कूद, नृत्य-संगीत जैसी विधाओं को भी पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाता है, ताकि कच्ची उम्र से ही बच्चे अपनी रुचि के अनुरूप जीवन का लक्ष्य तय कर उस दिशा में आगे बढ़ सकें। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अपने शौक को लक्ष्य और फिर पेशे के रूप में चुनने से सफ़लता सुनिश्चित हो जाती है, क्योंकि इन्हें हासिल करने में इंसान अपना दिल, दिमाग और ताक़त लगा देता है। लक्ष्य-निर्धारण में देरी का अर्थ ही दूसरों से पिछड़ना है। आमतौर पर बच्चे कहते हैं कि मैं बड़ा होकर डॉक्टर, इंजीनियर या आई.ए.एस. बनूँगा, लेकिन इससे आगे बढ़ने का प्रयास नहीं करते। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने तो किशोरावस्था में ही गायिका बनने का प्रयास शुरू कर दिया था और इतिहास रच दिया। तय है, लक्ष्य के साथ जीना सीखने वाले मुडकर नहीं देखते। कई सारे उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि सफ़लता का बड़ा हिस्सा लक्ष्य-निर्धारण में जल्दी या देरी पर टिका है। महज़ आठ वर्ष की आयु में अमेरिकी तैराक माइकल फेलप्स ने तैराकी में ओलिम्पिक पदक जीतने का लक्ष्य साधा और आगे चलकर कुल अट्ठाईस पदक जीतकर ओलिम्पिक रिकॉर्ड कायम कर दिया। शिवाजी महाराज ने कहा था 'एक छोटा कदम लक्ष्य-निर्धारण की ओर बाद में सम्पूर्ण लक्ष्य हासिल करा देता है।' इसलिए सोच-विचार में समय गँंवाने के बजाए लक्ष्य चुनिए और उड़ान भरना शुरू कीजिए।
  1. अनुभवी व्यक्तियों का लक्ष्य-चयन के विषय में क्या मत है?
    (a) लक्ष्य सोच-विचार कर शीघ्र निर्धारित करना चाहिए।
    (b) लक्ष्य-निर्धारण करने में बड़ों की सलाह लेनी चाहिए।
    (c) लक्ष्य-निर्धारण करने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।
    (d) लक्ष्य-निर्धारण आर्थिक लाभ को देखकर किया जाना चाहिए।
  2. स्कूली स्तर पर विभिन्‍न विषयों के साथ अन्य विधाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा क्यों बनाया जाता है?
    (a) बच्चों के दिमाग को कुछ समय आराम मिल सके।
    (b) बच्चे रुचि के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ सकें।
    (c) बच्चों को अन्य विधाओं की जानकारी मिल सके ।
    (d) बच्चों का पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन भी हो सके।
  3. गद्यांश में लेखक ने प्रसिद्ध व्यक्तियों के उदाहरण क्यों दिए हैं?
    (a) उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करने के लिए।
    (b) सही उम्र में लक्ष-निर्धारण की महत्ता समझाने के लिए।
    (c) उनकी तरह परिश्रम कर महान बनने के लिए।
    (d) उनके जीवन के इतिहास से परिचित कराने के लिए।
  4. गद्यांश में प्रयुक्त 'उड़ान भरना' का अर्थ है:
    (a) सपने देखना
    (b) कल्पना करना
    (c) हवाई यात्रा करना
    (d) कोशिश करना
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - अपने शौक को लक्ष्य और पेशा बनाने से सफ़लता सुनिश्चित हो जाती है।
    कथन (R) - एक छोटा कदम लक्ष्य-निर्धारण की ओर बाद में सम्पूर्ण लक्ष्य हासिल करा देता है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (d) कथन (A) गलत है कारण (R) सही है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

कभी-कभी सहज से तेज़ गति में परिवर्तित होते क्रोध को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो उसके परिणाम उत्यंत घातक और पश्चाताप के भाव जगाने वाले हो सकते हैं। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोविश्लेषक टॉम जी. स्टीवेन्स ने अपनी किताब 'ओवरकम एंगर ऐंड एग्रेसन' में स्पष्ट किया है कि क्रोध-नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका यह है कि स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नज़रिए से देखें। दूसरों को उन स्थितियों पर प्रकाश डालने के लिए प्रोत्साहित करें, क्षमा करना सीखें, बीते को बिसारने की आदत विकसित करें और किसी को चोट पहुँचाने के बजाए प्रशंसा से उसका मूल्यांकन करें। याद रखें, क्रोध-नियंत्रण से आप स्वयं शक्तिशाली बनाते हैं। इससे आपकी खुशहाली और स्मृतियों का विस्तार होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिनियाटी के वैज्ञानिकों ने अपनी किताब 50 साइंस ऑफ मेंटल इलनेस में इन कमज़ोरियों पर प्रकाश डालते हुए गुस्से को काबू में रखने के कारगर सूत्र दिए हैं। क्रोध-नियंत्रण से हम अपना ही नहीं, दूसरों के उजड़ते संसार को फिर से आबाद कर सकते हैं क्योंकि शांत मन सृजन में समर्थ होता है। हमारे सृजनात्मक होने से ही मानवता का हित सध सकता है। तो जब भी क्रोध आए, तो इन उपायों को आजमाएँ। जीवन में बिखरी हुई चीजों को सँवारने की ओर कदम खुद बढ़ चलेंगे।
  1. क्रोध-नियंत्रण से होने वाले लाभों के संबंध में अनुपयुक्त कथन है।
    (a) इससे व्यक्ति स्वयं को शक्तिशाली बनाता है।
    (b) इससे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आती है।
    (c) इससे व्यक्ति की विस्मृतियों का विस्तार होता है।
    (d) इससे व्यक्ति की रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
  2. किस तरह का क्रोध अंततः पश्चात्ताप का कारण बनता है?
    (a) अत्यंत आवेग में किया गया क्रोध
    (b) सहज भाव से किया गया क्रोध
    (c) प्रायश्चित भाव से किया गया क्रोध
    (d) आत्मघात भाव से किया गया क्रोध
  3. मनोविश्लेषक स्टीवेन्स के अनुसार क्रोध पर काबू पाने पर सर्वोपयुक्त उपाय है।
    (a) परिस्थितियों पर दूसरों के नियंत्रण को स्वीकार करना।
    (b) परिस्थितियों पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना।
    (c) परिस्थितियों को अपने नज़रिए से और अच्छे से समझना।
    (d) परिस्थितियों को दूसरों के नज़रिए से जानने का प्रयास करना।
  4. क्रोध आने पर क्या करना चाहिए?
    (a) उसकी असहज अभिव्यक्ति
    (b) उसकी सहज अभिव्यक्ति
    (c) संयमित रहने का प्रयत्न
    (d) घातक परिणाम का स्मरण
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - क्रोध नवसृजन का संहारक है।
    कारण (R) - क्रोध अवस्था में क्षमाशीलता न्यून हो जाती है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या है।
    (d) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

शोर से होने वाली बहरेपन की बीमारी एक गंभीर स्वास्थ्यगत समस्या है। तेज़ आवाज़ हमारी श्रवण कोशिकाओं पर बहुत दबाव डालती है, जिससे वे स्थायी रूप से चोटिल हो सकती हैं। यदि सुनने की क्षमता एकबार चली गई तो उसे पुनः पाना नामुमकिन है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हीयरिंग रिपोर्ट' के मुताबिक विश्व की 1.5 अरब आबादी बहरेपन के साथ जी रही है। ध्वनि प्रदूषण दरअसल ऐसे अवांछित विद्युत चुंबकीय संकेत हैं, जो इंसान को कई रूपों में नुकसान पहुँचाते हैं। इसीलिए, शोर-प्रेरित बहरेपन पर फौरन ध्यान देने की ज़रूरत है। वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि निर्माण कार्य, औद्योगिक कामकाज़, जहाज बनाने या मरम्त करने संबंधी काम, अग्निश्मन, नागरिक उड्डयन आदि सेवाओं में लगे श्रमिकों में शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा अधिक होता है। आकलन है कि 15 फीसदी नौजवान संगीत-कार्यक्रमों, खेल-आयोजनों और दैनिक कामकाज़ में होने वाले शोर से बहरेपन का शिकार होते हैं। शोर-प्रेरित बहरनेपन की समस्या विकासशील देशों में ज़्यादा है, जहाँ तीव्र औद्योगीकरण, अनौपचारिक क्षेत्र के विस्तार और सुरक्षात्मक व शोर-नियंत्रणरोधी उपायों की कमी से लोग चौतरफ़ा शोर-शराबे में दिन-बिताने को अभिशप्त हैं। हमें यह समझना ही होगा कि श्रवण-शक्ति का ह्रास न सिर्फ़ इंसान को प्रभावित करता है, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक असर डालता है।
  1. शोर-प्रेरित बहरेपन का खतरा किस क्षेत्र से जुड़े लोगों को कम है?
    (a) जहाज-निर्माण से जुड़े लोगों को
    (b) स्वास्थ्य-सेवाओं से जुड़े लोगों को
    (c) खेल-आयोजनों से जुड़े लोगों को
    (d) संगीत-कार्यक्रमों से जुड़े लोगों को
  2. गद्यांश के संदर्भ में अनुपयुक्त कथन है -
    (a) विकासशील देशों में अनौपचारिक क्षेत्र विस्तार की समस्या नहीं है।
    (b) विकासशील देशों में शोर-निंयत्रणरोधी उपायों पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है।
    (c) कुछ सेवाओं से जुडे लोग अन्य की तुलना में बहरेपन के अधिक शिकार हैं।
    (d) कुछ खास सेवाओं से जुड़े युवा भी आज बहरेपन का शिकार हो रहे हैं।
  3. विकासशील देशों के लोगों के जीवन को अभिशप्त क्यों कहा गया है?
    (a) उनका जीवन अनेक सामाजिक संकटों से घिरा है।
    (b) उनका जीवन अनेक आर्थिक संकटों से घिरा है।
    (c) वे खराब सेहत वाली विवश ज़िंदगी बसर करते हैं।
    (d) वे शोर-शराबे से भी ज़िंदगी जीने को विवश हैं।
  4. तीव्र आवाज़ का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    (a) तंत्रिका-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (b) श्रवण-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (c) रक्त-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
    (d) हृदय-कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त
  5. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए:
    कथन (A) - वर्तमान में श्रवण शक्ति का ह्रास एक सार्वजनिक समस्या बन गई है।
    कारण (R) - आर्थिक विकास की अनियमित होड़ इस समस्या के मूल कारणों में से एक है।
    (a) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
    (b) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
    (c) कथन (A) सही है तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
    (d) कथन (A) सही है परंतु कारण (R) कथन (A) की गलत व्याख्या करता है।

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:-

कारण लिखिए:

(क) विमान के प्रति लेखक का आकर्षित होना

(ख) लेखक ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनना

पहली बार मैंने एम. आई. टी. में निकट से विमान देखा था, जहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न सब- सिस्टम दिखाने के लिए दो विमान रखे थे। उनके प्रति मेरे मन में विशेष आकर्षण था। वे मुझे बार-बार अपनी ओर खींचते थे। मुझे वे सीमाओं से परे मनुष्य की सोचने की शक्ति की जानकारी देते थे तथा मेरे सपनों को पंख लगाते थे। मैंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग काे अपना अध्ययन क्षेत्र चुना क्योंकि उड़ान भरने के प्रति मैं आकर्षित था। वर्षों से उड़ने की अभिलाषा मेरे मन में पलती रही। मेरा सबसे प्यारा सपना यही था कि सुदूर आकाश में ऊँची और ऊँची उड़ान भरती मशीन को हैंडल किया जाए।

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

यह एक 'साधारण महिला' की असाधारण कहानी है, जो अपनी असाधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रोत्साहन व प्रेरणा लेकर सफलता के शिखर पर पहुँची है।

वहाँ अंतरिक्ष में रहते हुए सुनीता का मन बारिश में भीगने, समुद्र या झील या फिर सरोवर में तैरने को कर रहा था। दरअसल अंतरिक्ष में रहते हुए हरदम गंदगी-सी महसूस होती है। भारहीनता के कारण पसीने की बूँद त्वचा से चिपकी रहती हैं। और धीरे-धीरे इकट्ठा होकर त्वचा को छोड़ देती हैं, लेकिन किसी चीज से टकराने से पहले वे इधर - इधर तैरती सी रहती हैं।

कभी-कभी सुनीता का पृथ्वी को स्पर्श करने का मन करता था। वह अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में सोचने लगती थी और यह सोचती थी कि चंद्रमा पर पूरी तरह उतरने से पहलें ही पृथ्वी पर वापस आना उन्हें कितना निराशाजनक लगा होगा।

रात से पृथ्वी जैसे टिमटिमाने लगती थी और जो क्षेत्र दिन में वीरान दिखाई दे रहे थे, वे चमत्कारी रूप से छोटी-छोटी बत्तियों के प्रकार से जगमगा उठते थे। ऐसे में सुनीता का जी करता था, 'समुद्र मैं डुबकी लगाने का।

(1) कृति पूर्ण कीजिए :    (2)

(2) कृति पूर्ण कीजिए :    (2)

(3) परिवार से प्रोत्साहन तथा प्रेरणा का महत्त्व' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।    (2)


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढक़र इसके आधार पर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

आज के दौर में जिसे देखो, वही दुखी, परेशीन, हताश और उदास नजर आता है। तमाम तरह की चिंताओं ने लोगों को घेर रखा है। कोई अपनी सेहत को लेकर परेशान रहता है, तो कोई काम-धंधे की मंदी या वेतन में कटौती से दुखी है। किसी को भविष्य की चिंता सता रही है तो कोई अपने मान-सम्मान के बारे में सोच कर मायूस महसूस कर रहा है। जाहिर है, ऐसे में हर कोई खुशी के पीछे भाग रहा है। कई लोग सोचते हैं कि अमीर उद्योगपति या मोटा वेतन पाने वाले पेशेवर लोग खुश रहते हैं और गरीबी या आर्थिक विपनन्‍नता ही खुशी से वंचित रहने की एकमात्र वजह है। लेकिन अगर धन से खुशी आती तो दुनिया में कई धनी लोग कुंठा और हताशा में जीवन नहीं जीते। खुशी पैसा नहीं, संतुष्टि का भाव है। यह पैसे से नहीं, हमारे प्रयासों से आती है और सबसे बड़ी बात है कि खुशी के पीछे भागने से खुशी नहीं मिलती। खुशी हमारे बिल्कुल आसपास होती है, जिसे हमें पहचानना और ग्रहण करना होता है।

ज्यादातर लोग खुशी हमेशा बाहर खोजते हैं, जबकि यह उसी परिवार में उपलब्ध होती है, जिसका हम अहम हिस्सा होते हैं। मुश्किल यह हैं कि आजकल परिवार की परिभाषा सिकुड़ गई है। हम सिर्फ पति-पत्नी और अपने बच्चों को ही परिवार मानने लगे हैं जबकि भाई-बहन, देवर-देवरानी, जेट-जेठानी, सास-ससुर, चाचा-मामा आदि सभी इस परिवार के सदस्य होते हैं। जब हम अपने परिवार के सदस्यों की खुशी में सच्चे मन से सम्मिलित होने लगते हैं और उनकी खुशी के लिए सक्रिय रहते हैं, तो खुशी स्वयं हमारे पास आती है। जब हम इस मानसिकता से व्यवहार करते हैं, तो परिवार के दूसरे सदस्य भी हमारे लिए ऐसा ही करते हैं। फिर खुशी न मिलने का कोई कारण नहीं हो सकता। इसलिए हम भले ही एक चारदीवारी में न रहकर अलग रहते हों, अलग खाना बनाते हैं, लेकिन मन से हम अपने संपूर्ण परिवार से जुड़े रह सकते हैं ।

(i) निम्नलिखित में से कौन-सा/से वाक्य गद्यांश से मेल खाते हैं ?   [1]

    1. संपूर्ण परिवार से जुड़कर खुशी पाई जा सकती है।
    2. दादा-दादी, चाचा-चाची, बुआ आदि को मिलाकर परिवार मानना चाहिए।
    3. दुनिया में सभी धनी कुंठाग्रस्त और हताश नहीं है।
    4. तथाकथित खुशी को धन से नहीं खरीदा जा सकता।
      विकल्प:
      1. केवल I
      2. II और III
      3. केवल IV
      4. I, II, IV

(ii) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए:   [1]

कथन: हमें अपने परिवार की खुशियों में सच्चे मन से और सक्रियता से उपस्थित रहना चाहिए।

कारण: यही प्रसन्न रहने का एकमात्र साधन है।

विकल्प:

  1. कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  2. कथन ग़लत हैं, लेकिन कारण सही है।
  3. कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  4. कथन सही है, लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है।

(iii) प्रत्येक व्यक्ति खुशी के पीछे क्यों भाग रहा है?    [1]

  1. आर्थिक विपन्नता के कारण
  2. विभिन्‍न चिंताओं से घिरे होने के कारण
  3. 'खुशी' से स्वस्थ रह पाएँगे, ऐसी सोच के कारण
  4. 'खुशी' से पैसा आएगा, ऐसी सोच के कारण

(iv) खुश रहने के लिए आवश्यक है:    [1]

  1. आर्थिक संपन्नता
  2. प्रतिष्ठित होना
  3. उद्योगपति होना
  4. संतोषी होना

(v) आजकल लोगों की चिंता के कारण हैं:    [1]

  1. अस्वस्थ होना, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
  2. आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना, हताशा
  3. उदासी, वेतन कटौती, व्यावसायिक मंदी
  4. निराशा, आर्थिक मंदी, अस्वस्थ होना

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अकतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

“परंतु मैं तो इस पक्ष में जरा भी नहीं हूँ। हमारी भारत सरकार हमारी पढ़ाई पर कितना पैसा खर्च करती है और हम चंद पैसों के कारण विदेशों में जा कर बस जाएँ? यादि सभी बुद्धिजीवी विदेशों में जाकर बस जाएँगें तो हमारे देश की उन्नति किस प्रकार संभव हो सकेगी।”
  1. वक्ता इस समय किस से मिलने आई है? वक्‍ता के यहाँ आने का कारण भी बताइए।   [2]
  2. इस समय यहाँ किस व्यक्ति के विषय में और क्या बात की जा रही है जिसे सुनकर वक्ता ने यह सब कहा था?     [2]
  3. प्रस्तुत पंक्तियों के आधार पर वक्ता के चारित्र की 'तीन' विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।    [3]
  4. विद्यार्थियों में अपने देश के बजाय विदेश में शिक्षा प्राप्त करने की बढ़ती चाह के कारण भविष्य में देश को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? समझाकर लिखिए।     [3]

Read the extract given below and answer in Hindi the questions that follow:

निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

“यह सब समय का फेर है, दीदी! मेरे भाग्य में यही सब लिखा था। मुझे एक फैक्ट्री में नौकरी मिल गई थी। मैं अपने को बहुत खुशनसीब समझ रहा था कि मुझे इतनी छोटी उम्र में ही नौकरी मिल गई।"
  1. 'दीदी' कह कर किसे संबोधित किया गया है? वक्ता का संक्षिप्त परिचय दीजिए।   [2]
  2. 'समय का फेर' किसे कहा जा रहा है और इस समय के फेर से वक्ता पर क्या प्रभाव पड़ा था?    [2]
  3. 'दीदी' ने वक्ता की सहायता क्यों, कब और किस प्रकार से की थी?    [3]
  4. अवतरण में दी गई पंक्तियों के आधार पर उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए कि मुसीबत में पड़े व्यक्ति की सहायता करना ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य होता है।  [3]

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